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जब जांची गईं परीक्षा की कापियां

jab jaanchee gayee pareekshaa kee kopiyaan

 

 

 

 

 

 

 

 

जब जांची गईं परीक्षा की कापियां

(रेट-वेट डेट-वेट में वेट क्या है वेट करिए)

 

श्रीमानजी ने

परीक्षा की कापियां जांचीं,,

पहले ऊपर के पृष्ठ की ऐण्ट्रीज़ बांचीं।

 

स्मृति जैना, पांच मार्च, बयालीस किलो

अदिति शर्मा, पांच मार्च, चालीस किलो

सोना गुलाटी, पांच मार्च, छियालीस किलो

आरती सिक्का, पांच मार्च, पैंतालीस किलो

लगभग सारी कापियों में

तारीख़ के साथ उल्लेख था वज़न का,

उनका माथा बुरी तरह ठनका।

रहस्य कुछ समझ में नहीं आया

तो लडक़ियों को बुलवाया—

भई स्मृति, अदिति, सोना गुलाटी,

ये कौन सी है नई परिपाटी?

पांच मार्च तो ठीक है,

क्योंकि ये परीक्षा की तारीख़ है।

पर ये बयालीस किलो, चालीस किलो!

छियालीस किलो, पैंतालीस किलो!!

वज़न बताओ किस बात का लिक्खा?

चुप क्यों हो आरती सिक्का?

 

—सर! वही तो किया हमने,

जो बताया हमारी मैडम ने!

उन्होंने ये बात बताई थी.

ख़ास करके समझाई थी—

डेट-वेट साफ़ लिखना अच्छी तरह से,

हमने डेट के साथ लिख दिया

अपना वेट भी सच्ची तरह से।

 

उनकी बेटी बड़ी प्यारी बड़ी भोली,

अगले दिन श्रीमानजी से बोली—

ऐग्ज़ाम देने जा रही हूं,

ये रहा राइटिंग पैड ये रहा स्केल।

पैंसिल देखो

कितनी अच्छी छिल रही है,

लेकिन पापा,

वो….. वेइंग मशीन नहीं मिल रही है।

 


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