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हिन्दी की लय में हो साधना

hindi kee laya mein ho saadhanaa

 

 

 

 

 

 

 

 

हिन्दी की लय में— हो साधना

(धरती को दिव्यांगना बनाने वाली, साधना, संभावना और सद्भावना की भाषा है— हिन्दी)

 

गूंजे गगन में, महके पवन में,

हर एक मन में— सद्भावना।

 

मौसम की बाहें, दिशा और राहें,

सब हमसे चाहें— सद्भावना।

 

घर की हिफ़ाज़त, पड़ौसी की चाहत,

हरेक दिल को राहत, तभी तो मिले,

हटे सब अंधेरा, ये कुहरा घनेरा,

समुज्वल सवेरा, तभी तो मिले,

जब हर हृदय में, पराजय-विजय में,

हिन्दी की लय में— हो साधना।

 

गूंजे गगन में, महके पवन में,

हर एक मन में— सद्भावना।

 

समय की रवानी, फतह की कहानी,

धरा स्वाभिमानी, जवानी से है।

गरिमा का पानी, ये गौरव निशानी,

सुखी ज़िंदगानी, जवानी से है।

मधुर बोल बोले, युवामन की हो ले,

मिलन द्वार खोले— संभावना।

 

गूंजे गगन में, महके पवन में,

हर एक मन में— सद्भावना।

 

हमें जिसने बख़्शा, भविष्यत् का नक्शा,

समय को सुरक्षा, उसी से मिली।

ज़रा कम न होती, कभी जो न सोती,

दिए की ये जोती, उसी से मिली।

नफ़रत थमेगी, मुहब्बत रमेगी,

ये धरती बनेगी— दिव्यांगना।

 

गूंजे गगन में, महके पवन में,

हर एक मन में— सद्भावना।

 

मौसम की बाहें, दिशा और राहें,

सब हमसे चाहें— सद्भावना।

 

 


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