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हाईऐस्ट और हाइटैक रावण

हाईऐस्ट और हाइटैक रावण

—चौं रे चम्पू! पिछली जात्रा कहां की भई तेरी?

—चचा, अम्बाला के पास एक गांव है बराड़ा। वहां पहली बार कविसम्मेलन हुआ और पहली बार मैंने संसार का सबसे ऊंचा रावण देखा।

—सबते लम्बौ रावण! बराड़ा में! समझ में नायं आई बात!

—हां बराड़ा के खेतों में। उस गांव में एक हैं राणा तेजिन्दर चौहान। शिल्पकार, पेंटर, अभिनेता, एथलीट, अनेक कलाओं का जीता-जागता गुलदस्ता हैं। उन्होंने पच्चीससाल पहले बीस फिट का रावण यह सोचकर बनाया था कि उनका रावण आतंकवाद, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, अहंकार, वैमनस्य, कन्याभ्रूण हत्या, दहेज प्रथा,अशिक्षा, बढ़ती जनसंख्या, बेरोज़गारी, मूल्य-वृद्धि, राजनीति का अपराधीकरण, भ्रष्टाचार, मिलावटखोरी, जमाखोरी और असमानता जैसी बुराइयों से बना है। अगले वर्षउनको लगा कि इतती सारी बुराइयां बीस फिट में समा नहीं सकतीं। इसलिए वे हर साल अपने रावण की ऊंचाई बढ़ाते रहे। स्वयं डिजायन बनाते हैं और निर्माण मेंपूरे गांव का सहयोग लेते हैं। पहले कुछ वर्षों में चौहान का रावण जिले का सबसे ऊंचा बना, फिर प्रदेश का, फिर देश का, फिर आकलन करने वालों ने कहा किएशियाभर में इतना बड़ा रावण नहीं बनता। अब कहते हैं कि संसार का सबसे बड़ा रावण है। सर्वधर्म समभाव को ध्यान में रखते हुए इसके निर्माण में सभी धर्मों केलोगों को सम्मिलित करते हैं। इस बार उन्होंने आगरा से बहुत सारे मुस्लिम कारीगरों को बुलाया जो पिछले आठ महीने से इस रावण को बनाने में लगे हुए थे।

—सबते बड़ौ ऐ, जे पड़ताल कैसै भई?

—अरे! दो बार लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड में इनका नाम दर्ज हो चुका है। दशहरा मैदान पहुंचने तक मुझे कुछ मालूम नहीं था। मैंने सहज भाव से उनका प्रणाम स्वीकारकिया। लहीम-शहीम व्यक्तित्व। लम्बे-लम्बे केश, ऊपर टोपी। लग रहा था कोई कलाकार या कव्वाल हैं। बोले, जी मैं आपको बीसियों बरस से सुनता हुआ आ रहा हूं।आपकी कटे हाथ, बीयरबाज़ी, शिकारकथा कविताएं मुझे कंठस्थ हैं। फिर उस महाकाय प्राणी ने मेरे पैर छूने के लिए कार में अन्दर हाथ बढ़ाया तो मैं संकोच से भरगया, लेकिन व्यक्तित्व मुझे अच्छा लगा। धीरे-धीरे तथ्यों की पर्तें खुलीं। लिम्का बुक वालों ने मान लिया तो गिनीज़ बुक वाले कैसे पीछे रह जाते। इस बार गिनीज़ की टीम भी आई हुई है। पिछले साल एक सौ अस्सी फिट का था, इस बार एक सौ पिचानवै फिट का।

—तौ कैसै खड़ौ कियौ इत्तौ ऊंचौ रावण?

—क्रेन लगी हुई थीं, आधुनिक तकनीकों से रावण की लम्बाई बढ़ाई। हर बार उसमें तकनीकी शोधन होता रहा। शुरू में उसके दस सिर होते थे। सिर एक ही रखा, बाकी तो काल्पनिक हैं।  फिर धीरे-धीरे उसे पतला किया जाने लगा और उसके छत्र की ऊंचाई भी लम्बी होने लगी। इस बार रावण के कान नहीं थे। हवा के कारण उसके खड़ा रहने में परेशानी पैदा करते। रावण किसी की सुनता भी कहां था। बहरहाल चचा, इस आदमी ने कर दिया कमाल। देखते ही बनता था। हमारे मंच केसामने श्रोता थे और सबसे बड़ा श्रोता रावण सामने खड़ा था। पचपन क्विंटल बांसों से बना बुराइयों का रावण। जैसे मुस्कुरा रहा हो कि तुम्हारी इन कविताओं से मेरेऊपर क्या फर्क पड़ने वाला है। मैं मंच पर पूरे समय उस रावण को निहारता रहा। शानदार लच्छेदार मूंछें, लिपिस्टिक लगे होंठ, बेहद सुन्दर आंखें, हरे रंग का लम्बाअंगरखा, ऊंचा करने के लिए हाई-हील की जूतियां, पचास फिट ऊंची तलवार, सत्तर-अस्सी फिट लम्बा चेहरा। दो दिन पहले तक उनको संशय था कि हम उसको खड़ाकर पाएंगे कि नहीं। लेकिन बराड़ा गांव की युवा टीम निःशुल्क अपनी सेवाएं दे रहे थी। तनवीर जाफरी साहब ने रावण के लिए एक कसीदा लिखा— ‘है आज बनी दुनिया में अलग पहचान हमारे रावण की। कोई भी नहीं सानी इसका, क्या शान हमारे रावण की।’ और चचा, एक बात और बताऊं आपको!

—बता, जरूर बता!

—अधिकतम छः फिट वाले राम जी के तीर से रावण नहीं मरता। तेजेन्द्र चौहान अपने अंचल के नौकरशाहों, नेताओं, जागरूक नागरिकों, अलग-अलग धर्मों के लोगोंकी उपस्थिति में किसी बड़े शिक्षाशास्त्री से कम्प्यूटर रिमोट द्वारा रावण का दहन कराते हैं। हाईऐस्ट रावण हाईटैक है। आज संध्याकाल लाखों दर्शकों के सामने फुंकजाएगा। अगले साल बनेगा दो सौ फिट का।

 


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  1. kahi ki to janta hai jo ek saath Ravan ke hi naam per sahi nishulk shata t deti hai

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