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    hamaare haakim bahare ke bahare

     

     

     

     

     

     

     

     

    हमरे हाकिम बहरे के बहरे

    (जिसका हुकुम चले वह हाकिम, सुनवाई न होने पर मजबूरों का पद-गायन)

     

    गुल

    गुलशन

    गुलफ़ाम कहां!

    हम तो

    ग़ुलाम ठहरे!!

    हाकिम

    बहरे के बहरे!!!

     

    किसके आगे दिल को खोलें,

    कौन सुनेगा किस को बोलें,

    किसे सुनाएं कड़वा किस्सा

    बांटे कौन दर्द में हिस्सा?

     

    कहने भर को लोकतंत्र है,

    यहां लुटेरा ही स्वतंत्र है,

    खाद नहीं बन पाई खादी

    पनप नहीं पाई आज़ादी।

     

    भर-भर के भरमाया हमको,

    खादी खा गई दीन-धरम को,

    भाई चर गए भाईचारा

    तोड़ दिया विश्वास हमारा।

     

    नेता अपने भोले-भाले

    ऊपर भोले अन्दर भाले

    डरते हैं अब रखवालों से

    घायल हैं उनके भालों से।

     

    घाव बड़े गहरे

    हाकिम बहरे के बहरे।

     

    गुल

    गुलशन

    गुलफ़ाम कहां!

    हम तो

    ग़ुलाम ठहरे!!

    हाकिम

    बहरे के बहरे!!!

     

     

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