गुप्त दानवीर

—चौं रे चम्पू! तैंनै मरे पीछे देह दान कद्दई, पर देह रहते दान चौं नायं करै?

—चचा, आप जिसे दान मानते हैं, वैसा तो नहीं, पर सुपात्रों के लिए समय-दान करता हूं। सैकड़ों भूमिकाओं, विमोचनों और ग़ैरधनोपार्जक कामों में जो श्रमदान किया है, सो अलग। पत्थर उठाकर सड़क नहीं बनाता, पर शब्द उठाकर ऐसी जगह रख देता हूं जो पत्थर पर खोदे जा सकें। इतनी अकूत संपदा मेरे पास है नहीं कि भारत की ग़रीबी मिटा सकूं। झुग्गियों का पुनर्वास कर सकूं। जो थोड़ा-बहुत करता हूं, उसका नाम भी नहीं चाहता मैं। अरे चचा, हां, तुम्हें एक आदमी के बारे में बताता हूं जो देह रहते सुपर दानी है। चलते-चलते एक ख़बर पढ़ी। सैनफ्रांसिस्को के बेघरबार लोगों के पुनर्वास के लिए किसी संस्था ने विज्ञापन दिया कि कोई व्यक्ति यदि अमरीका के प्रसिद्ध अरबपति वारन बफ़े के साथ अकेले भोजन करना चाहता है तो बोली लगाए कि उसके एवज में कितना धन दे सकता है। पैसा पुनर्वास में जाएगा। अरब-खरबपति आदमी के साथ कौन भोजन नहीं करना चाहेगा! वह भी तो अपने समय का दान करेगा। भोजन करने में श्रम लगता है, इसलिए उसका श्रम-दान भी मान लो। और चचा! वहां भोजन का मतलब ये नहीं होता कि दावत में गए और टूट पड़े। प्लेट भरी ऊपर पहाड़ तक और झाड़ के पीछे बैठकर सूंत गए! वहां लंच-डिनर का आदाब ये है कि आप मेज़ पर बैठेंगे, टैन कोर्स की सर्विस होगी। पहले बहुत सारे स्टार्टरों के साथ वाइन मिलेगी, फिर धीरे-धीरे विविध व्यंजन परोसे जाएंगे। तो बोली लगाई एक अनाम व्यक्ति ने। डालरों की राशि की संख्याएं मज़ेदार हैं। एक, दो और ज़ीरो संख्याओं को छोड़कर बाकी सारी संख्याएं क्रम से रख दी हैं। एक और दो इसलिए नहीं हैं कि एक तू खाएगा, दूसरा मैं खाऊंगा। ज़ीरो इसलिए नहीं है कि वह आदमी गुप्त दानवीर है, अपना नाम नहीं चाहता। उसने लंच के लिए दान में दिए 34,56,789 अमरीकी डॉलर! भारतीय मुद्रा में हो जाते हैं, लगभग 23 करोड़ 14 लाख रुपए। सामाजिक उत्थान के लिए इतनी ही राशि वाले ऐसे लंच वह पहले भी कर चुका है। अब बताइए दोनों में कौन बड़ा दानी?


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