गूगल का धुआं

गूगल का धुआं

—चौं रे चम्पू! सवाल मैं पूछूं कै तू पूछैगौ?

—चलिए आज मैं ही पूछता हूं आपसे। बताइए गूगल क्या है?

—गुग्गल की तौ एक गांठ होयौ करै। जाय पजार दें तौ धूंआ उठै। कौने-कूचेन में घुस कै सिगरे कीड़ा-मकोडन्नै मार देय ठौर। पर लोग भूल गये वाय।

—चचा, भूले नहीं हैं। गूगल का धुंआ घर के रोम-रोम रेशे-रेशे में समा चुका है और वह कीटाणुओं की जगह घर की सारी पोलपट्टी निकालकर ले जाता है।

—जे कौन से पेड़ पै होय?

—चचा, गूगल संयुक्त राज्य अमरीका की एक बहुराष्ट्रीय प्राइवेट कम्पनी है, जिसने इंटरनेट पर सर्च, क्लाउड कम्प्यूटिंग और विज्ञापन तंत्र में सिक्का जमायाहुआ है। यह कम्पनी स्टैनफ़ौर्ड यूनिर्वसिटी के दो शोध-छात्रों ने बनाई थी। कम्पनी का मिशन था दुनियाभर में ज्ञान का फ़ायदा पहुंचाना।

—जे तौ भलौ काम ऐ।

—हर भले काम के पीछे ख़तरे भी छिपे होते है चचा। गूगल के धुंए ने संसार का सबसे ज़्यादा डाटा निकाल लिया है। पूरी दुनिया में अपने डाटा-केंद्रों से दस लाख से ज़्यादा सर्वर चलाता है, कहते हैं कि उसके सर्च इंजन पर खोज अनुरोधों का आंकड़ा दस अरब से ज़्यादा हो चुका है। इसकी जीमेल की ईमेल सेवा के साथ सोशल नेटवर्किंग के अनेक मंच-प्रपंच हैं, जैसे ऑर्कुट, गूगल बज़, गूगल क्रोम, पिकासा, गूगल टॉक, गूगल प्लस, ब्लॉगर और यूट्यूब। अलेक्सा नाम की सर्वेक्षण संस्थाके अनुसार गूगल डॉट कॉम इंटरनेट की सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली वेबसाइट है। विश्व का सबसे ताकतवर ब्राण्ड है गूगल। गूगल ने आज सब कुछ उपलब्ध करादिया है।

—फिर तौ भड़िया ऐ!

—अरे चचा सब कुछ उपलब्ध करा दिया है, लेकिन सबका सब कुछ उपलब्ध करने का मिशन है। आज आपका जो गोपनीय है वह सब गूगल के लिए ओपनीय है।आपकी कोई प्राइवेसी नहीं। कॉपीराइट और सेंसरशिप गए तेल लेने। देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी तक अज्ञान के अन्धकार में कीड़े-मकोड़े मारने के लिएगुग्गल जला रहा है, पर दिमाग में धुंए के अलावा कुछ है नहीं। ये गूगल बहुत बड़ी सुविधा के तौर पर सबके पास आया, पर बढ़ा रहा है हर इंसान की व्यक्तिगतसूचनाओं का सरमाया। ये तो है कि जीमेल का एकाउंट खोल कर फोकट में ईमेल करो, चित्र भेजो, चैट करो, तत्काल दू-बर-दू बात करो। बिना लिफ़ाफे, बिना टिकिट कीचिट्ठीबाज़ी। एक को नहीं, हज़ार को एक साथ भेजो। मरे भाल की या धरे माल की ख़बर करनी हो, माल-मता बताना हो, अता-पता बताना हो, न्यौते का थाल भेजना हो,वो भी तत्काल भेजना हो, ईमेल करो। गूगल को लेकिन सब पता चल जाता है। यही घपला है चचा!

—तौ गूगल का करैगौ सबकी बातन्नै जानि कै?

—कमाल कर दिया चचा! हम जो चिट्ठी भेजते थे, जीभ से अपनी लार लिफ़ाफे के गोंद पर फिरा कर चिपका देते थे। जिसको चिट्ठी मिलती थी, उसे पता चल जाता थाकि किसी ने नहीं खोली। गूगल पर जितने भी जीमेलधारी हैं उन सबकी अंदरूनी जानकारी इस अमरीकी कम्पनी के पास है। पूरा डाटा बैंक! आम आदमी तो आम आदमी,सरकारी कर्मचारियों से लेकर नेता और बड़े-बड़े उद्योगपति क्या कर रहे हैं, ये सब गूगल देवता को अमरीका में बैठे-बैठे पता है। हमारे देश में संकट डिफेंस पर भीमंडराया हुआ है। डिफेंस की सूचनाएं, बीच के हैकर खोल लेते हैं।

—हैकर कौन?

—हैकर माने चिट्ठी बीच में ही खोल लेने वाले। हैकरों के गुलिस्तान हैं चीन और पाकिस्तान। चीनी नौजवान सैनिक कम्प्यूटर वायरस बनाने में उस्ताद हैं। जीमेल काकिला तोड़कर अपना डाटा बेस तैयार कर रहे हैं। आप समझते हैं कि अगली लड़ाई तोप-तमंचों से होगी, बम-गोले-बारूद से होगी? ना चचा, ना। साइबर युद्ध के तौर परहोगी, क्योंकि आपके नागरिकों की जन्मपत्री से लेकर भविष्य में होने वाली संतान की जानकारी तक उनके पास है। छेद के छेद के छेद में जाकर, बाल की खाल केबाल से भी सूचनाएं निकाल कर ये गूगल का धुंआ अपने मकड़जाल में हमारा सारा कच्चा चिट्ठा लिए बैठा है। सावधान रहना होगा, अगर देश को बचाना है!

—होयगी सो देखी जायगी, मेरी एक ईमेल आईडी तौ बनाय दै!

 


Comments

comments

Leave a Reply