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गॉड को चाहिए थे आईपॉड और आईपैड

गॉड को चाहिए थे आईपॉड और आईपैड

 

—चौं रे चम्पू! जे पतरी सी सिलेट-पट्टी सी का ऐ तेरे हाथ में?

—स्लेट-पट्टी! ये बहुत अच्छा नाम दिया आपने इसका। इस स्लेट-पट्टी में आसमान के ग्रह-नक्षत्रों के दशलव-बिन्दु, बनती हुई छायाएं, बदलती हुई आकृतियां, दल के दल बादल, ज्ञान की हवा के झोंके, दोस्तों की दोस्तियां, लिखने की क़लम, संगीतकार के साज़, चित्रकार की कूची, फ़िल्मकार काकैमरा, विद्वानों के पुस्तकालय, कारीगर का छापाखाना, खेलने के मैदान, दिमाग़ी कसरत के अखाड़े, क्या नहीं है!

—नाम का ऐ जा सिलेट-पट्टी कौ?

—चचा इसको कहते हैं आईपैड-टू। अंग्रेज़ी में लिखो तो आई छोटी है और पैड की पी बड़ी है। जो आदमी अपनी ‘आई’ को, यानी अपने ‘मैं’ को छोटा रखे वह अपने पैड को बड़ा कर सकता है। यह कम्प्यूटर की दुनिया का आधुनिकतम उपकरण है। इसे बना कर नई पीढ़ियों को सौंपने वाला स्टीवजॉब्स नहीं रहा।

steve jobs

 

 

 

 

 

 

 

 

—उमर का ई वाकी?

—बिचारा पचपन-छप्पन की उम्र में ही चला गया। पचपन की उम्र में तो मैं लिख रहा था, ‘पचपन का है पर बचपन का हो ले, तेरा नवजीवन आया’। कम्प्यूटर की पायल बांध कर मैं बाल नृत्यगोपाल हो गया था। पिछले चार महीने से इस स्लेट-पट्टी को लेकर स्वयं को ब्रह्मांड का नागरिक माननेलगा हूं। आईपैड से पहले आईमैक, आईपॉड, आईफोन, आईट्यूंस, आईक्लाउड एपल तकनीक से बने। इतने सिमटे हुए आकार में उपभोक्ताओं को अकल्पनीय सुविधाएं परोसने वाला स्टीव जैसा कोई तकनीक-नियोजक अब तक दुनिया में नहीं हुआ। पूरी दुनिया ने उसका लोहा माना! कंपनियों नेसोना-चांदी काटी।

—भौत अमीर ओ का?

—सो तो था, पर ज्ञान का कारोबारी था। तपस्वी-मनस्वी था, यशस्वी था। कुंवारी मां की संतान था। जॉब्स दम्पति ने गोद लिया। जॉब्स एक मैकेनिक थे। स्टीव औपचारिक पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया। सोलह साल की उमर में निर्वाण की तलाश में नीब करौरी कैंची धाम वाले बाबा के पास आयाथा। उसको राधा-कृष्ण बहुत अच्छे लगते थे। बौद्ध धर्म से प्रभावित हुआ। भारत का आध्यात्मिक चिंतन उसको अद्भुत लगता था। यहां से जब वापस गया तो निर्वाण की नींव पर निर्माण में लग गया। एक ओर प्रेम, दूसरी ओर शांति, तीसरी ओर अपनी आई को छोटा रखना, ये भारत से सीख करगया था। फिर उसका आदर्श बना एडीसन, जिसने संसार में सर्वाधिक आविष्कार किए। अपने पिता के कारखाने में एक दोस्त के साथ मिलकर उसने एक कम्प्यूटर बनाया। उसका बनाया हुआ पहला कम्प्यूटर छः सौ छियासठ डॉलर में बिका। कम्प्यूटर की क्षमताएं देखकर किसी कम्पनी नेअचानक ही सौ कम्प्यूटर का ऑर्डर दे दिया। बाज़ार बनाने में इस शख़्स को देरी नहीं लगी। सौ कम्प्यूटर बनाने के लिए चाहिए था पैसा। उसने अपनी कार बेच दी, उधार लिया और जब वापस पैसा आया तो पैसे से और पैसा, और पैसे से और और पैसा आया। ख़ुद ज़मीन पर सोने वाला, अपनेअन्दर के अहम की आई को छोटा रखने वाला और अपनी आंखों की आई को बड़ा रखने वाला स्टीव जॉब्स जानता था कि जॉब की मर्यादाएं क्या होती हैं। कोई काम किया जाए तो परिपूर्णता में कैसे किया जा सकता है। एपल वन, एपल टू, एपल थ्री। संरचनाएं बदलती गईं।

—एपल माने सेव, खाइबे वारौ?

—हां, सेव! उसका प्रतीक चिन्ह। कहते हैं कि पहला एपल एडम और ईव ने खाकर सृष्टि की संरचना की थी। दूसरा एपल न्यूटन की नाक पर गिरा था तो उसने ऐसा वैज्ञानिक विश्लेषण किया कि विज्ञान उसके कारण मानवता की नाक बन गया। तीसरा ये थोड़ा सा खाया हुआ एपल जिसमेंरंग-बिरंगी पट्टियां हैं या सफेद ज्योति के रूप में पीछे से एडीसन का बल्ब जगमगाता है। इसने कमाल कर दिया। ख़ुद अपने क्रियाकलाप से जॉब्स ने ये सिद्ध कर दिया कि दूरदर्शिता, परिश्रम, तकनीक के प्रति सम्मान और बाजार का ज्ञान, इन सबके लिए अहंकार शून्यता, राधा-कृष्ण वाला प्रेमऔर बुद्ध की अहिंसा ज़रूरी होती है।

 

jagjit singh

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

—इत्ते अच्छे लोग जल्दी चौं चले जायं रे? प्यारौ गायक जगजीत ऊ चलौ गयौ!

—हां चचा! स्टीव जोब्स और जगजीत सिंह को इसलिए बुला लिया गॉड ने कि आईपॉड और आईपैड पर सुरीली ग़ज़लें सुन सके, देख सके। धरती पर तो ये कभी नहीं मर सकते!

 

 


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3 Comments

  1. Steve jobs par apni kalam se jo baate likhi hai wo padhkar bahut accha likh bahhut si baate patachali jo pehle humne nahi suni thi aagey bhi aap sach aur vishes baate likhkar hume prerit kariye dhanyawaad sir

  2. वाह ! जे तो मजे की बात हेगाई, भगवान खो भी आई-पैड पसंद आगयो | लेकिन एक बात बड़ी साईं कई आपने , भगवान अच्छे आदमियन को नेक जल्दी बुला लेत है|

  3. Dono hi apne chhetra me maharathi the. Dono ki jiwan dusron k liye aadarsh rahega. Hamme or unme ek hi antar hai ham wo dusron ko kuch dekar jate hai

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