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ग्लोबल-वॉर्मिंग की हिंदी क्या हो?

global waarming kee hindi kyaa ho

 

 

 

 

 

 

 

 

ग्लोबल-वॉर्मिंग की हिंदी क्या हो?

(हिंदी के पारिभाषिक शब्द बनाने वालों से क्षमा-याचना सहित)

 

श्रीमानजी से बोलीं मिसेज़ निधि–

बच्चों को हिंदी सिखाऊं किस विधि?

जानती हूं कि बिना हिंदी में गति लाए,

इन्हें कोई भारतीय संस्कृति कैसे समझाए।

अमरीका में रहते हैं,

छोटे ने पूछा— मां! ग्लोबल-वॉर्मिंग को

हिंदी में क्या कहते हैं?

 

श्रीमानजी बोले– ग्लोबल वॉर्मिंग!

शब्द है बड़ा शाइनिंग चार्मिंग सर्वाइविंग!!

ग्लोब शब्द हिंदी में भी ग्लोब है,

इसका किसे क्षोभ है?

अगर लाई जाए और थोड़ी नर्मी,

तो कर लीजिए ग्लोबल-गर्मी!

ग्लोबल-गर्मी में अनुप्रास है,

बोलने में भी न्यूनतम प्रयास है।

देखिए, यह शब्द चल जाएगा!

 

वे बोलीं— पर हिंदी का नहीं कहलाएगा।

हिंदी हो तो पूरी हिंदी की बुनावट हो,

क्यों उसमें अंग्रेज़ी-उर्दू की मिलावट हो!

 

श्रीमानजी बोले— तो फिर नोट करिए, शुद्ध हिंदी से अपनी डायरी भरिए!

अवनि-अगन, अचला-आतप, धरित्री-दाह,

स्थिरा-संतप्ति, विश्व-विदाह,

भूगोल-भट्टिका, जगत-ज्वलन,

भूमा-भभूका, भूमण्डली-ऊष्मीकरण,

वसुमति-ताती, पृथिव्या-प्रचंड,

पृथ्वी-प्रतापन, भूष्मा-अखंड,

भुवन-भट्टी, क्षिति-संताप,

वैश्विक ऊष्माविस्तार, भूतल ताप,

संसार-सेंक, थली-तपिश, मही-दहक,

भूमण्डली-भभक और धरा-धधक!

और भी सौ-सवा सौ बना सकता हूं,

पर समाज में नहीं चला सकता हूं!

अगर हिंदी को रखना है ज़िंदा,

तो मेल-मिलाप से मत होना शर्मिंदा!

 


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