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  • घूमते-घूमते लुढ़क गया पेपरवेट
  • घूमते-घूमते लुढ़क गया पेपरवेट

    (प्रेमविहीन कामनाएं मुंह के बल गिरती हैं)

     

     

    स्टैनो की नौकरी के लिए

    अनेक कन्याएं बैठी थीं

    ऑफ़िस की गैलरी में।

     

    अंदर आई एक कन्या से

    बॉस ने पूछा—

    पर मंथ

    कितना रुपया लोगी

    सैलरी में?

     

    एड़ियों पर उचक कर

    कन्या बोली हिचक कर—

    सर

    बीस हज़ार रुपया लेगी हम।

     

    बॉस बोला—

    नो प्रॉब्लम!

    बीस हज़ार रुपया हम देगा,

    हां, बीस हज़ार रुपया तुमकू

    मज़े के साथ मिलेगा।

     

    बॉस ने पेपरवेट

    और आंखों को नचाते हुए,

    फिर अचानक अपनी हथेली पर

    बीस हज़ार की संख्या

    मेंहदी की तरह रचाते हुए,

    दोहराया—

    बीस हज़ार…. मज़े के साथ

    समझ में आया?

     

    ‘मज़े के साथ’ वाली बात

    देखकर और सुनकर,

    स्टैनो निकल गई

    बॉस की हसरतों को धुनकर।

     

    हो नहीं पाया आखेट,

    घूमते-घूमते लुढ़क गया

    पेपरवेट।

    wonderful comments!

    1. Uma Shankar Jul 6, 2013 at 3:10 pm

      आदरणीय कविश्रेष्ट , आपकी कविताये अंतर्मन को छू जाती हैं . माँ शारदे का आशीर्वाद सदैव आपके साथ रहे , ऐसी कामना है . सादर प्रणाम , उमा शंकर

    2. Uma Shankar Jul 6, 2013 at 3:11 pm

      आदरणीय कविश्रेष्ट , आपकी कविताये अंतर्मन को छू जाती हैं . माँ शारदे का आशीर्वाद सदैव आपके साथ रहे , ऐसी कामना है . सादर प्रणाम , उमा शंकर

    3. manjula Jan 10, 2014 at 3:04 pm

      आदरणीय चक्रधर जी आप से पहिला परिचय बरेली में अपनी प्रधानाचार्या उर्मिला शुक्ला के मुख से "बूढ़े बच्चे "सुन कर हुआ था ..आज कार्यालय में आप के साथ छायाचित्र खिंचवाने का अवसर मिला . अनुरोध है कि मेरे ब्लॉग्स जिनमे अंग्रेज़ी से हिंदी में काव्यानुवाद और कुछ मौलिक रचनाये हैं उन पर अपनी अमूल्य टिप्पणी से अनुग्रहित करें ..ह्रदय से आभार ..www.kavirumi.blogspot.com/kavivivekannd.blogspot.com/www.raasvilaas.blogspot.cm/www.videshikavita.blogspot.com/www.samayase.blogspot.com

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