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घर बनता है घर वालों से

20110510 Ghar banta hai ghar walo seदरवाज़ों से ना दीवालों से,

घर बनता है घर वालों से!

 

अच्छा कोई मकां बनाएगा

पैसा भी ख़ूब लगाएगा

पर रहने को नहिं आएगा

तो घर उसका भर जाएगा

सारा मकड़ी के जालों से।

 

दरवाज़ों से ना दीवालों से,

घर बनता है घर वालों से!

 

घर में जब कोई न होता है

दादी है और न पोता है

घर अपने नैन भिगोता है

भीतर-ही-भीतर रोता है

घर हंसता बाल-गुपालों से।

 

दरवाज़ों से ना दीवालों से,

घर बनता है घर वालों से!

 

तुम रहे भी मगर लड़ाई हो

भाई का दुश्मन भाई हो

ननदी से तनी भौजाई हो

ऐसे में तो राम दुहाई हो

घर घिरा रहेगा सवालों से।

 

दरवाज़ों से ना दीवालों से,

घर बनता है घर वालों से!

 

गर प्रेम का ईंट और गारा हो

हर नींव में भाईचारा हो

कंधों का छतों को सहारा हो

दिल खिडक़ी में उजियारा हो

घर गिरे नहीं भूचालों से।

 

दरवाज़ों से ना दीवालों से,

घर बनता है घर वालों से!


21 Comments

  1. anurag singh |

    chakradhar ji shabdateet baten hain aapki is rachna me

  2. madan mohan jain |

    kitna sahi kaha hey apney.

  3. priti shukla |

    Bete ko ilm nahi hota
    ma jagi kitni raton ko
    ab baat agar kuchh kahti hai
    bete ko jaise chubhti hai
    samwad na kitne saalon se.

    ghar banta hai gharwalon se.

    – dhrishtta ke liye kshama keejiyega.

    • प्रीति जी आपने अप्रीतिकर सचाई बताई है। कविताई विडंबनाओं को भी सामने लाती है। आपने अच्छी पंक्तियां बनाईं।

  4. bhavesh bhatt |

    Ham ne to nek iraade se giraaya ghar ko,
    aandhiyo ke liye thodi si jagah ho jaaye. -bhavesh bhatt

    • भावेश जी!
      मेरे पिता ने लिखा था–
      फिर उठें तूफान हर रुख से,
      मैं नहीं डरता किसी दुख से।
      और सुख की बात ही क्या है
      वह चला जाए बड़े सुख से।

  5. true and lovely one sir!

  6. wakai me kamal kar diya aapne, mai to aapka fan ho gaya pahli hi kavita me

  7. vinay shukla |

    aaj ke daur me badalte bhayichare ka mukammal bayaan hai yah kavita. dhanywaad

  8. sunita patidar |

    bhut sahi kaha aapne ki gher gherwalo se banta hai lekin gherwalo mye ekta na hui to vah sawalo se bher jayega .

  9. Narayan singh Adhikari |

    bahut hi maarmik kavita chakradhar jee. dil ko choo gai

  10. Jai Prakash Shaw |

    sachchi baat….nice composition…

  11. पैने पत्थर जोड़ कर,
    बने न घर दीवार,
    सीधी प्रेम की ईंट से,
    बनता घर परिवार.

    बर्तन चार साथ में,
    मैंने रखे जोए,
    बिन बाजे वो रह सके,
    ऐसा कभी न होए.

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