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एक का दबदबा दूसरों को न दबाए

एक का दबदबा दूसरों को न दबाए

 

—चौं रे चम्पू! आज तौ बड़ौ खुस दिखाई दै रयौ ऐ? अचानचक्क कछू पाय गयौ ऐ का?

—चचा, मैंने तो कुछ नहीं पाया, पर देश के ग़रीब नौजवान निकट भविष्य में पा सकते हैं। चुनाव से पहले अनेक पार्टियों ने युवाओं

को लैपटॉप देने का वादा किया है। मैं तो इस कल्पना से ही प्रसन्न हूं कि हमारे देश के एक अरब बीस करोड़ लोगों में,

अधिकांश लोगों के पास, मान लो साठ करोड़लोगों के पास, लैपटॉप होगा, तो काम बड़े टॉप का होगा। भविष्य को सुधारने का एकमात्र औज़ार कम्प्यूटर ही हो सकता है। किसी भी रूप में हो, डैस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट या मोबाइल! अगर सारे नौजवान तुम्हारी बगीची के जैसे निष्ठावान, ब्रह्मचर्य व्रतधारी, नेक और शरीफ़ हों, जिनका ध्यानसिर्फ़ ऐसे आत्मबल की ज़ोर आजमाइश पर हो जो किसी को नुकसान न पहुंचाए, शरीर-सौष्ठव बढ़ाए, तन को वासना के कुंठाजन्य तत्काल आवेगों से बचाए, कामनाओं को निरंकुश न बनाए,

ज़िन्दगी में हर एक दोस्त को अपनी चाय का टोस्ट न बनाए, तो लैपटॉप वरदान है।

—तौ का लैपटॉप ते हमाए बालक कुस्ती करिबौ ऊ सीख जांगे?

—हर हालत में सीख जाएंगे। उन्हें जब इल्म होगा कि ओलम्पिक कुश्ती में कब, कौन, किस दाव से जीता था, और वह दाव हमारे चचा को नहीं आता है, तो लैपटॉप तुम्हारे सामने प्रस्ताव रखेगा कि इस वाले दाव को सिखाया जाए। क्या खाया जाए, क्या खिलाया जाए। पूरे संसार में हमारेनौजवानों का लोहा मानने वाले लोग तब पैदा होंगे जब कुश्ती-कला में आप अपने शागिर्दों को लोहा बना देंगे। और बात सिर्फ कुश्ती की ही नहीं है। हर क्षेत्र की जीवन-कुश्तियां लड़ने का सलीक़ा आएगा। न्यायपालिका क़ानून के दाव-पेचों में देरी लगाती है। सबूतों के साथ जो छेड़ाछाड़ी होती है,वह मुमकिन न रह जाएगी। ऑडियो-वीडियो, ई-मेल, अपराध की दुनिया की हुलिया टाइट कर देंगे। किसने, किस वक़्त क्या कहा, क्या किया, क्या करना चाहा,

ये लैपटॉप आपको बताएगा और उस प्रमाण को कोई नहीं झुठलाएगा, क्योंकि इंटरनेट पर जाने वाली कोई सूचना

कभी मरती नहीं है और उसके आगे कोई दलील दम भरती नहीं है। संदेह का लाभ उठाकर छुट्टल घूमने वाले अपराधी ऐसी मौज नहीं लूट पाएंगे। दाग़ी चरित्र वाले लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। सबका लेखा-जोखा होगा। इसलिए अगर लैपटॉप बंटते हैं तो ये काम बड़ा चोखा होगा। उधर कार्यपालिका क्या कर रहीहै, कितना धन किस योजना के लिए किन स्रोतों से आवंटित हुआ, किन माध्यमों से पहुंचाया गया, ये हमारे हर नौजवान की जानकारी में होगा। ई-गवर्नैंस के ज़रिए पारदर्शिता आएगी।

—मैंनैं सुनी ऐ कै जामै नंगई की अपार पारदर्सिता ऊ रहैगी।

—चचा, हर अच्छी और नई चीज़ अपने साथ कुछ दुर्गुण तो लेकर आती ही है। देह भी क़ुदरत माता के गर्भ से आई है। उसकी किलोल-क्रीड़ाओं को कब कौन रोक सका है, पहले परदे के पीछे थीं, अब परदे पर हैं।

चचा, मन के कीड़ों को मारने के दवाई भी इंटरनेट से बनाई जा सकती है। युवा मनहर तरह की अंगड़ाई लेता है। समय को बदलना भी उसी का काम है। अगर शीलता और राष्ट्र के प्रति संकल्पशीलता उस लैपटॉप के ज़रिए दी जा सकें तो अच्छे-बुरे की पहचान करने में देर नहीं लगेगी।

—कौन सी पार्टी बांट रई ऐं?

—सबसे पहले कॉंग्रेस पार्टी के सिब्बल साहब ने कहा कि वे करोड़ों छात्रों को ‘आकाश’ नाम का सस्ता टैबलेट देंगे। अब लगभग हर छोटी-बड़ी पार्टी के पास युवाओं को लुभाने का फ़ॉर्मूला है। वादा करने में क्या जाता है? जीत गए तो कहेंगे केन्द्र ने पैसा नहीं दिया, हार गए तो कहेंगे उनसे मांगोजिन्होंने वादा किया था।

जो भी हो, शिक्षा के समान अधिकार के लिए अब नौजवानों को चाहिए दुनिया से जुड़ने का ये प्रगतिशील औजार, लेकिन मेरा तो है फक़त एक सरोकार।

—तू अपनौ सरोकार बता!

—अगर इन लैपटॉपों में नहीं हुई हिन्दी, और नहीं हुईं हमारी भारतीय भाषाएं, तो धूमिल हो जाएंगी हमारी और हमारी बगीची की आशाएं। अंग्रेजी अपना दबदबा बढ़ाने के लिए हमारी हिन्दी को न दबाए। हर पार्टी से ये वादा भी लिया जाए कि लैपटॉप बांटने से पहले इतनी करें केयर, किउसमें हों हमारी भाषाओं के सॉफ़्टवेयर।

 

 


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