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दोस्त तुमने देर कर दी!

dost tumne der kar dee

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दोस्त तुमने देर कर दी!

(तीस साल पहले यह पीड़ा-प्रसंग लिखा था, टीस अभी तक संग है।)

 

नदी में डूबते हुए एक आदमी ने

पुल पर चलते आदमी को देखकर

आवाज़ लगाई— बचाओ!

 

पुल पर चलते आदमी ने

नीचे रस्सी गिराई और कहा— आओ!

 

लेकिन डूबता हुआ आदमी

रस्सी पकड़ नहीं पा रहा था,

रह-रह कर चिल्ला रहा था—

मैं मरना नहीं चाहता

बड़ी महंगी ज़िंदगी है,

अभी कल ही तो एबीसी कंपनी में

मेरी नौकरी लगी है।

 

इतना सुनते ही ऊपर वाले आदमी ने

अपनी रस्सी खींच ली,

और उसे डूब कर मरता देख

अपनी आंखें मींच लीं।

दौड़ता-दौड़ता एबीसी कंपनी आया

हांफते-हांफते उसने

अधिकारी को बताया—

देखिए, अभी-अभी आपका एक आदमी

डूबकर मर गया है,

इस तरह आपकी कम्पनी में

एक जगह ख़ाली कर गया है।

लीजिए, मेरी डिग्रियां संभालें,

बेरोज़गार हूं, मुझे लगा लें।

 

अधिकारी हंसते हुए बोला—

दोस्त,

तुमने देर कर दी,

अभी दस मिनिट पहले

हमने वो जगह भर दी।

और इस नौकरी पर हमने

उस आदमी को लगाया है,

जो उसे धक्का देकर

तुमसे पहले यहां आया है।


 


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