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दिल खिंचा आता है याद में

20110509 Dil khincha aata hai yaad meinकंधे पर सैर करने वाले

मेरे बच्चे!

मेरी हथेलियों पर उड़ने को बेताब

मेरे श्याम कबूतर!

कैसी गर्वीली अकड़ से

तू गरदन घुमाता था,

मुझे अपनी नज़रों से

दुनिया दिखाता था।

 

जितनी बार पलक झपकाई तूने

आकाश का समंदर का

इंसान का बंदर का

रोचक और भौंचक

इतिहास बना।

 

उठा ले गए तुझे आतताई

कहां-कहां से उमेठते होंगे

निरदयी पापी!

हाय री मेरे आपाधापी!

नज़रों से ओझल कैसे होने दिया

मैंने तुझे?

 

कोमल आज्ञाकारी अवगाहा,

अंधेरे में भी खींच लाता था

मेरा मनचाहा।

दिल खिंचा आता है

तेरी याद में,

पता नहीं क्या-क्या हुआ

तेरे साथ बाद में!

 

याद तो घनेरी,

तुझे भी सताएगी मेरी!

पर रोते हुए हृदय से

यही दुआ है,

खुश रहना

जहां भी रहो

मेरे प्यारे कैमरे!

तुम बिछुड़े बुरा हुआ है!

 

 


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5 Comments

  1. पहले कैमरा खींचता था तस्वीरें, अब उससे खींचीं तस्वीरे खींचती हैं उसकी याद में,
    जुदाई उसकी करती है व्याकुल, अब रह गयीं है यादें बस उसकी उससे खींचीं तस्वीरों में।

    • ठीक कहा पलक! पीटेर्सबर्ग के एक रेस्त्राँ में पलक झपकते ही कोई दुष्ट उठा ले गया मेरा ओलंपस कैमरा। ये कविता उसकी याद में पीटर्सबर्ग से मॉस्को आते हुए रेल में लिखी थी। बेचारे अनिल जनविजय मेरे लिए कहाँ कहाँ नहीं घूमे, भूल नहीं सकता…

      • काश मिले एक नया कैमरा, जो हो डी.एस.एल.आर.,
        और खो जायें आप नई दुनिया में, खुश हो जाये आप जैसा कलाकार|

        वैसे अनिल जी बरेली वाले है न? कई दिन बाद नाम सुना उनका. उनकी काफ़ी समय पहले जब मैं स्कूल में था तो एक कविता पढ़ी थी – रक्तकमल शायद नाम था। कोर्स में नही थी। बस एक दोस्त के यहाँ कोई संग्रह था। पता चला कि वो बरेली के हैं सो पढ़ ली क्योंकि मेरे पापा भी बरेली के हैं।

        • पलक डियर एक नया कैमरा लिया तो है D-90 निकौन। कभी कभी समय निकालता हूँ। मेरी चित्रशाला में तुम्हें कुछ चित्र दिखेंगे। अनिल से पूछोङ्गा, बरेली में कहाँ के हैं।

  2. sunita patidar |

    dil kicha ata hai yad mye aapne kemre ko patra banaker kavita likhi padker laga use kemre ke jane ka aapko kitna dukh hua vah aapki abhivaykti se pata laga usmey aavagha sabda ka aartha samaz nahi aya.

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