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    ढूंढो कि अब कहां है

    (हिटलर आया और अचानक ग़ायब हो गया)

    पहरेदारों के

    सिर फोड़ता हुआ….

     

    यम के नियम

    पीछे छोड़ता हुआ….

     

    इतिहास की

    चट्टानी पर्तों को

    तोड़ता हुआ….

     

    पाताल की

    सुरंगों को

    मोड़ता हुआ….

     

    हिटलर

    भाग छूटा

    नर्क की जेल से

    और सीधे

    हमारी दिल्ली में

    आ गया रेल से।

     

    उतार फेंके

    उसने

    स्वास्तिक के निशान,

    छिपा दिया

    अपना शिरस्त्रान।

     

    लोगों से

    मूंछें छिपाता रहा,

    राम जाने

    कहां-कहां जाता रहा।

     

    वैसे बदला नहीं था

    अपने

    चाल-चलन में,

    अंतिम बार

    देखा गया

    खादी भवन में।

    wonderful comments!

    1. Jai Manikpuri अगस्त 24, 2012 at 11:49 अपराह्न

      kya baat hai sir..

    2. Jai Manikpuri अगस्त 24, 2012 at 11:49 अपराह्न

      kya baat hai sir..

    3. Jai Manikpuri अगस्त 24, 2012 at 11:49 अपराह्न

      kya baat hai sir..

    4. vijay Tyagi अगस्त 25, 2012 at 1:17 पूर्वाह्न

      Guru ji pranaam, Hitlar to Hitlar hai Use bhala kiska darr hai Sharnarthi ban ghusa jis khadi bhavan main Wo bhavan aaj kehlata uska ghar hai..... Guru ji, aapki saral baaton main Dariya jaisi gahraai hoti hai aapko koti koti Naman

    5. Anil Ranjan अगस्त 25, 2012 at 2:00 पूर्वाह्न

      pranaam karta hun

    6. Anil Ranjan अगस्त 25, 2012 at 2:00 पूर्वाह्न

      pranaam karta hun

    7. Anil Ranjan अगस्त 25, 2012 at 2:00 पूर्वाह्न

      pranaam karta hun

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