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ढूंढो कि अब कहां है

20120821 -250 - dhoondho ke ab kahaan hai

ढूंढो कि अब कहां है

(हिटलर आया और अचानक ग़ायब हो गया)

पहरेदारों के

सिर फोड़ता हुआ….

 

यम के नियम

पीछे छोड़ता हुआ….

 

इतिहास की

चट्टानी पर्तों को

तोड़ता हुआ….

 

पाताल की

सुरंगों को

मोड़ता हुआ….

 

हिटलर

भाग छूटा

नर्क की जेल से

और सीधे

हमारी दिल्ली में

आ गया रेल से।

 

उतार फेंके

उसने

स्वास्तिक के निशान,

छिपा दिया

अपना शिरस्त्रान।

 

लोगों से

मूंछें छिपाता रहा,

राम जाने

कहां-कहां जाता रहा।

 

वैसे बदला नहीं था

अपने

चाल-चलन में,

अंतिम बार

देखा गया

खादी भवन में।


Comments

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7 Comments

  1. Guru ji pranaam,
    Hitlar to Hitlar hai
    Use bhala kiska darr hai
    Sharnarthi ban ghusa
    jis khadi bhavan main
    Wo bhavan aaj kehlata
    uska ghar hai…..

    Guru ji,
    aapki saral baaton main Dariya jaisi gahraai hoti hai
    aapko koti koti Naman

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