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धरना यूं ही चाल्लैगा

धरना यूं ही चाल्लैगा

—चौं रे चम्पू! धरना कौ मतलब का ऐ रे?

—धरना शब्द की व्युत्पत्ति और उसकी मूल धातु की कोई प्रामाणिक जानकारी फिलहाल मेरे पास नहीं है, लेकिन अनुमान का धरना देकर कह सकता हूं किअलग-अलग धातुओं को धरा पर धरा जाए तो धरना होना चाहिए। धरना शब्द संज्ञा भी है और क्रिया भी। संज्ञाविहीन क्रिया और क्रियाविहीन संज्ञा भी हो सकताहै। अब तो एक धरनावादी दल सर्वनाम भी है। आप, हम, तुम, तू, मैं, ये सब सर्वनाम हैं। तू-तू मैं-मैं हो जाए तो पुन: क्रिया कहलाएगी।

—मैंनै तौ धरना कौ सूदौ-सादौ मतलब पूछौ ओ। चल बोल जो तेरे मन में आय।

—मन में तो छटांक भर भी नहीं आ रहा, फिर भी मनभर बताता हूं कि मूल धातु अगर ‘ध’ हो, तो ‘ध’ अथवा ‘धा’ से गतिमयता का बोध होता है। धावक दौड़ता है, धाताहै. लेकिन धरना तो दौड़ने के विपरीत बैठ जाने को कहते है। धरना दौड़ता नहीं है, दौड़ाता है। धरना कहता है, अमुक दिन अमुक बजे तमुक को साथ लेकर आओ। धरनीपर कोई आधार ढूंढ कर बैठ जाओ। बहुत से लोग बहते पानी के पास बने घाट को धरना कहते हैं। धर महाभारत के आठ वसुओं की सूची में तीसरे नंबर पर आता है। अनल, अनिल, धर, ध्रुव, प्रत्यूष, प्रभास, विष्णु और सोम। सोम के कारण धरना व्यक्तिवादी हो जाता है। उसका सरोकार बहुतों से नहीं रहता। दो-तीन लोगों कोहटाने या एक-दो लोगों को बचाने के लिए होने लगता है।

—और बता।

—और धर को धारण करने वाला भी कहते हैं। तुम्हारे चम्पू के नाम में अंत में धर लगा हुआ है। यानी, चक्र ने धर के साथ नाम में धरना दे दिया। पुलिस जो धरनादेती है उसको दबोचना कहते हैं, नौकरी में किसी को धर लो तो वह नियुक्ति करना होता है। नौकरी पर धरना। उधार लेने वाला आदमी जब किनारा करे और धर दबोचाजाए तो भी धरना कहलाता है। वस्तुतः धरना में धर्म और कर्म का अनुपात देखा जाता है। आपने किस उद्देश्य से धरना दिया, इसे नापने का कोई धर्मकांटा अभीनहीं बना है। मूल मकसद के मुद्दे के गुद्दे कट जाते हैं और धरने धरे रह जाते हैं। माना कि इन दिनों जो धरना संस्कृति आई है, उसने बड़ों-बड़ों के धरातल हिला दिए। धरा का धरेजा धीरज के साथ एक सवाल करता है कि मैं तेरी धरैया तेरी मैया हूं, वोटों के रूप में तुझे धरोहर सौंपी थी। उस धरोहर का धर्ता होने के बाद तू धर्म का कर्ता क्यों नहीं रहा? जिस अवलम्ब पर तू टिका, उसे लम्बित क्यों किया? फाइलें लम्बित वायदे विलम्बित। कितने ही लोग अब तुझे हास्य का धरना-स्थल मान रहेहैं। तेरे धरना-बैठन पर व्यंग्य द्वारा अपनी सामाजिक ऐंठन दूर कर रहे हैं।

—लल्ला और दिमाग़ लगा।

—जब धरना देने वाले दिमाग़ नहीं लगा रहे तो मैं क्यों लगाऊं? एक शब्दशोधक होने के नाते आपसे कहना चाहता हूं कि धरना जिस भावना पर धरा होता है, उसकी आधारितता पर आज सवाल उठ रहे हैं। आम ने खास में धरना दिया, खास ने आम में। किस-किस का नाम बताऊं, क्या रखा है नाम में? तुम भी जल थे, हम भी जलथे, इतने घुले-मिले थे कि एक-दूसरे से जलते न थे। न तुम खल थे, न हम खल थे, इतने खुले-खिले थे कि एक-दूसरे को खलते न थे। अचानक तुम हमसे जलने लगे।तो हम तुम्हें खलने लगे। तुम जल से भाप हो गए। और ‘तुम’ से ‘आप’ हो गए। समझे कुछ?

—कछू नायं समझे।

—कुछ दिन न समझो, तो भी चलेगा। आजकल एक गाना सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहा है। गीत खांसी से शुरू होता है, ‘धरना यूं ही चाल्लैगा, मंत्री पुलिस बुला लेग़्गा, धरना होल नाइट’। अब शब्दकोश में धरना शब्द का एक अर्थ मज़ाक भी होना चाहिए। लोकतंत्र इस मज़ाक के धरने को कब तक सहन करेगा, यह उसकी धारण-क्षमता पर निर्भर करता है। बहरहाल, उम्मीदें बहुत लगाईं थीं, जो अभी भी कम नहीं हुईं हैं, लेकिन अगर यही हाल रहा तो उम्मीदों के चिराग बुझने लगेंगे क्योंकि वहां तेल धरना नहीं देगा।

 


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