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    dhad dhamchak mach gayee re

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    धड़ धमचक मच गई रे!

    (गांव के मेले में नौटंकी वाली बाई का उल्लास भरा नृत्य-गीत।)

    धड़ धमचक,

    धड़ धमचक मच गई रे!

    इक छैल-छबीली

    इक छैल-छबीला,

    लैला को मिल गया

    मजनूं का टीला।

    टीले पे खड़े थे

    कितने ही शराबी,

    कइयों के मन में

    आ गई खराबी।

    —ओ हो जी!

    पर लैला बच गई रे!

    धड़ धमचक मच गई रे!

    बनवारी का छोरा

    नमकीन बड़ा है,

    अरे इधर को आजा

    तू किधर खड़ा है?

    थानैं पास बुलावै

    थारी छम्मकछल्लो,

    दिलदार मेरे तुम

    जरा प्यार तो कल्लो।

    —ओ हो जी!

    छोरां नैं जंच गई रे!

    धड़ धमचक मच गई रे।

    मेलां मां ले चल

    मेरे यार फरेबी,

    तू मनैं खिला दे

    दो-चार जलेबी।

    ना लेउं महावर

    ना रचनी मेंहदी,

    जब मैं थारे सै,

    पहलां ई कह दी—

    —क्या कह दी?

    तेरे प्यार में रच गई रे!

    धड़ धमचक मच गई रे!

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