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    चीनू का स्वाभिमान जागा

    (बच्चे के अद्भुत तर्क उसके स्वाभिमान की रक्षा करते हैं)

    बहुत पुरानी बात है जब

    मित्रवर सुधीर तैलंग,

    अपने एक चित्र में भर रहे थे रंग।

     

    तभी चंचल नटखटिया

    उनकी नन्ही चीनू बिटिया

    बोली— ले चलिए घुमाने।

     

    सुधीर करने लगे बहाने।

    पर बिटिया के आगे

    एक नहीं चली,

    अड़ गई लली—

    पापा चलो चलो चलो!

    फौरन चलो चलो चलो!!

    बिलकुल अभी चलो चलो चलो!!!

     

    अब पापा क्या करते,

    बोले रंग भरते-भरते—

    चीनू चीनी चीनो!

    चलते हैं बेटी

    पहले जूते तो पहनो।

    चीनू चटपट अंदर भगी,

    जूते लाई और उल्टे पहनने लगी।

     

    सुधीर ने रंग भरना रोका

    और चीनू को टोका—

    मैं बड़ी हो गई, बड़ी हो गई

    बार-बार कहती हो,

    लेकिन जूते हमेशा

    उल्टे ही पहनती हो।

    क्या तुम्हें सीधे जूते पहनना

    नहीं आता है?

     

    पापा की बात सुनकर

    चीनू का स्वाभिमान जागा

    उसने उल्टा प्रश्न दागा—

    क्या आपको

    उल्टे जूते पहनना आता है?

    wonderful comments!

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