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  • चिड़िया की पहली उड़ान का गीत
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    चिड़िया की पहली उड़ान का गीत

    (पहली उड़ान किसी भी क्षेत्र की क्यों न हो आकाश के द्वार खोल देती है)

     

    चिड़िया! तू जो मगन,

    धरा मगन, गगन मगन,

    फैला ले, पंख ज़रा,

    उड़ तो सही, बोली पवन।

    अब जब हौसले से,

    घौंसले से आई निकल,

    चल बड़ी दूर, बहुत दूर,

    जहां तेरे सजन। चिड़िया!

     

    वृक्ष की डाल दिखें,

    जंगल ताल दिखें,

    खेतों में झूम रही

    धान की बाल दिखें।

    गांव देहात दिखें,

    रात दिखे, प्रात दिखे।

    खुल कर घूम यहां,

    यहां नहीं घर की घुटन। चिड़िया!

     

    राह से राह जुड़ी,

    पहली ही बार उड़ी,

    भूल गई गैल-गली

    जाने किस ओर मुड़ी।

    मुड़ गई जाने किधर

    गई जिधर, देखा उधर,

    देखा वहां खोल नयन

    सुमन-सुमन, खिलता चमन। चिड़िया!

     

    कोई पहचान नहीं,

    पथ का गुमान नहीं,

    मील के नहीं पत्थर

    पांव के निशान नहीं।

    ना कोई अगर-मगर

    डगर-डगर जगर-मगर,

    पंख ले जाएं उसे

    बिना किए कोई जतन। चिड़िया!

     

    चिड़िया! तू जो मगन,

    धरा मगन, गगन मगन। चिड़िया!

     

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