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बोतल के बिना नहीं जाऊंगा

बोतल के बिना नहीं जाऊंगा

—चौं रे चम्पू! बिद्याभूषन सम्मान के बाद कोई बिद्या पाई कै कपाट बंद कद्दए ज्ञान प्राप्ती के?

—पुरस्कार के झोले में शॉल और ताम्रपत्र लेकर जब मैं एयरपोर्ट पहुंचा तब एक ज्ञान प्राप्त किया।

—बता, कौन सौ ज्ञान पायौ?

—अरे चचा, सुरक्षा जांच के वक्त मेरे पीछे एक युवक खड़ा था। उसके पास छोटे-छोटे तीन-चार  थैले थे। मेरे लैपटॉप की ट्रे के पीछे उसके थैले रखे हुए थे। स्कैनरमशीन से हमारा सामान निकला। सुरक्षाकर्मियों ने उसके झोले रख लिए और सभी झोले खुलवाए गए। मैंने अपना लैपटॉप ट्रे से उठाया और बैग में रख लिया। सुरक्षाकर्मी महिला ने उससे कहा कि आपके बैग में एक बोतल है, खोल कर दिखाइए। बोतल पर इतने सुरक्षा-कवच थे कि खोलना आसान नहीं था। उसने आना-कानी की, क्यों खुलवाना चाहते हैं? मुस्कुराते हुए दूसरे सुरक्षाकर्मी ने बताया कि एक सीमा से ज़्यादा लिक्विड ले जाना मना है। आपके पास पूरी एक बोतल है, फेंक दीजिए उसको। वह बोला, मेरी जान चली जाए पर फेंकूंगा नहीं। अब कई सुरक्षाकर्मी इकट्ठा हो गए। उन्होंने मिलकर उस बोतल की पैकिंग को कैंचियों से काटा। वे कैंचियां वे थीं जो दूसरों के सामान से निकाली गईं थीं।

—बोतल में ते का निकरौ?

—सरसों का तेल। पूछा गया, कहां जा रहे हो? उसने बताया, कुवैत। तो क्या सरसों का तेल वहां नहीं मिलता? उसने उत्तर दिया, जी ये मन्त्रकीलित है। तो क्या तेलमें कील भी डाली हैं? नहीं जी, पूजा-पाठ का है। शनिदेव पर चढाना है। किसी ने कहा कि कुवैत में कौन से शनिदेव का मंदिर है? वह बोला, बनाना है। क्यों? बोला, जी वहां मेरा इतना तेल निकालते हैं कि मैंने तय कर लिया है कि वहां शनिदेव का मंदिर बनाऊंगा। आप मेरे सामान में देखो, आपको एक पीपल की गांठ मिलेगी, एक कांसे की चौड़ी कटोरी, उनको आपने नहीं रोका। तेल को क्यों रोक रहे हो? वे बोले, कांसे की कटोरी ले जाने में कोई ऐतराज नहीं है। पीपल की गांठ में भी कोई आपत्ति नहीं है। हो सकता है कि कुवैत के लोगों को हो, क्योंकि विदेश में कोई भी वनस्पति ले जाना अपराध है। उसने कहा, जी मुझे शनिदेव की पूजा करनी है, पीपल उगाऊंगा वहां पर। मेरा काम यही है कि वहां पर हरियाली पैदा करूं, होर्टिकल्चर का आदमी हूं। पीपल का पेड़ लगाऊंगा और उसकी जड़ में तेल चढाऊंगा, फिर कांसे की कटोरी में तेल भरकर अपनी परछाईं देखूंगा, उससे शनिदेव प्रसन्न होंगे। फिर इसी तेल का परांठा बना कर मैं गाय को खिलाऊंगा और अमावस्या के दिन सूर्यास्त के समय, सरसों के तेल के परांठे पर काले तिल डालकर काले कुत्ते को खिलाऊंगा। अब भला हो उन सुरक्षाकर्मियों का कि उसकी इतनी कहानी सुनते रहे, लेकिन माने नहीं। तेल की बोतल कूड़ेदान में फेंक दी। अजी चचा, फिर क्या हुआ!

—हां, हां बता! दिलचस्प ऐ मामलौ।

—अरे, वह तो सारे सुरक्षाकर्मियों को धता बताते हुए पीछे गया और कूड़ेदान से बोतल निकाल लाया। किसी ने उसको पकड़ा, बंद करने की धमकी दी। बोला जी, कर दो, पर बिना सरसों के तेल की बोतल के नहीं जाऊंगा, पूजा करूंगा। कुवैत में जो तेल निकलता है, उससे जो कमाई होती है, उससे बनता है डॉलर और डॉलर की काट हैं शनिदेव! मुझे वहां के तेल का फ़ायदा अपने मुल्क में लाना है। चचा, उसका तेल सुरक्षाकर्मियों ने आने नहीं दिया।

—फिर?

—फिर मैं उसके पास बैठा तो मुझे कहानी सुनाने लगा। कृष्ण काले हैं, शनिदेव सुपर काले हैं। सूर्य, शनि के पिता हैं। सूर्य को अपनी पत्नी छाया पर शक हो गया कि मुझ जैसे दीप्त देवता का पुत्र काला कैसे हो सकता है! शनि ने सोचा, मुझे बदला लेना है, मेरे पिता ने ऐसा मेरे बारे में क्यों सोचा कि मैं उनका पुत्र नहीं हूं। तपस्याकरी। भगवान शंकर ने वरदान दे दिया कि हे शनि, तू सब ग्रहों में सबसे ऊंचा होगा और तू जिसका भी नाश करेगा, कर सकता है, जिसका भी भला करेगा, कर सकता है। मुझे शनिदेव से डालर का नाश करके देश का भला करना है।

—तौ ज्ञान कौन सौ हासिल भयौ तोय?

—ज्ञान यह मिला कि डॉलर अच्छी तरह हमारा तेल निकाल रहा है।

 


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