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बिना पर पैर के क्रुद्ध परिंदे

बिना पर पैर के क्रुद्ध परिंदे

 

—चौं रे चम्पू! एक परिंदा जाके सिर पर पैर, पहेली कौ उत्तर मालूम ऐ?

—क्या घिसी-पिटी पहेली है चचा! हर परिंदे के सिर, पर और पैर होते हैं। पर तुम मेरी पहेली का उत्तर नहीं बता सकते। ना पर, ना पैर, फिर भी करै सैर, गुस्सैल चिड़िया, उड़ावे कोई गैर। बताओ। आप बता नहीं सकते चचा। नए ज़माने की पहेली है।

—अरे! हम का जानैं! तू ई बता।

—पिछले दो साल से एक नई वीडियो गेम पहेली आई है जो मोबाइल, आईफोन, आईपैड पर टच स्क्रीन टैक्नोलॉजी से चलती है। फिनलैण्ड की रोवियो मोबाइल कम्पनी ने बिना पर और पैर के परिन्दों की कल्पना की और एक खेल निकाला, जिसका नाम है ’एंग्री बर्ड्स’। ये क्रुद्ध चिड़िया-चिरौटे दड़बों में बन्द छोटे-बड़े सूअरों पर धावा बोलते हैं। देखते-देखते ये खेल दुनियाभर में फैल गया है। बच्चे तो बच्चे, संसारभर के चच्चे-चच्ची इस सूअर मारक अभियान में लगे हुए हैं। एक गेम से दस हजार प्वाइंट मिल जाएं उससे तसल्ली नहीं होती। फिर अगला खेल, फिर अगले से अगला। अगला लगा ही रहता है। करोड़ से ज़्यादा ऐप बिक चुके हैं। करोड़ों लोग दिन-रात खेल रहे हैं। अफीम से ज़्यादा ख़तरनाक नशा है। ऑफिसों-घरों में, बसों में, मैट्रो स्टेशनों पर लोग लगे रहते हैं, अपने-अपने मोबाइलों और आईपैडों पर। आप समझेंगे कि वे एसएमएस कर रहे हैं। ना, वे क्रुद्ध आत्मघाती चिड़ियाओं से सूअरों पर वार करते रहते हैं।

—कम्पूटर में तौ सब कछू है सकै पर बिना पंख पैरन के चिड़िया उड़ैं कैसे ऐं?

—बच्चे, बूढ़े सभी को, मिला अनोखा खेल। सूअर सारे मर गए, चिड़िया फंसी गुलेल। यही तो फैंटेसी का मज़ा है। बहेलिए चिड़िया मारने के लिए गुलेल का इस्तेमाल किया करते हैं। कल्पनाशील, शरारती, रचनात्मक दिमाग़ ने सोचा कि क्यों न बिना पंख और पैर वाली चिड़िया को गुलेल में कंकड़ी बनाकर फेंका जाए। एक दिमाग़ के साथ डिज़ायनरों की पूरी टीम जुट गई। बर्ड फ्लू का सम्बन्ध सूअरों से था। इस सचाई ने खेल को विकसित करने में मदद करी। ये आत्मघाती चिड़ियाएं शायद आतंकवाद से प्रेरित हुई हों। गुलेल से छूटकर सूअरों के बाड़े पर गिरती हैं, आत्मोत्सर्ग कर देती हैं और खिलाड़ियों को लगाए रखती हैं। जब से मोबाइल टैक्नोलॉजी में टच स्क्रीन आई है तब से पता नहीं कौन-कौन से क्रिएटिव आइडियाज़ आदमी की खोपड़ी को टच करते रहते हैं। स्क्रीन पर उंगली से गुलेल को खींचो तो ऐसे ही तन जाएगी जैसे सचमुच की हो।

—दिखा हमें, तब पतौ लगै।

—हां लाऊंगा। आईपैड है मेरे पास। हरे रंग के छोटे-बड़े सूअर पत्थर या लकड़ी के बाड़ों में छिपे रहते हैं, कुछ बर्फ की सिल्लियों से ढके होते हैं। टुइंया से छोटे-छोटे सूअर हल्के इशारे से ही मर जाते हैं। मोटे हैलमेट वाले सूअर मुश्किल से मरते हैं। एक सूअर ताज लगा कर बैठा हुआ है। बहुत तरीके इस्तेमाल करो तब जाकर मरता है। चिड़िया भी रंग-बिरंगी हैं जो अलग-अलग मारक क्षमता रखती हैं। एक बम की तरह फट जाती है। काली है लेकिन गिरते ही लाल हो जाती है और स्क्रीन छूते ही ऐसा धमाका करती है कि क्या मुंबई स्टेशन पर हुआ होगा। अगल-बगल का सब तहस-नहस। पीले रंग की ऐसी है जो स्क्रीन छूते ही अपनी स्पीड को अमर सिंह की तरह तिगुनी कर लेती है। एक है सफेद रंग की अन्ना हजारे की तरह, आकाश से अंडा छोड़ती है, अंडा विस्फोटक है। एक चिड़िया है जो गुलेल से छूटने के बाद तिगुनी हो जाती है। पहले एक कंकड़ी से तीन चिड़िया मारी जाती थीं, अब एक चिड़िया तीन होकर न जाने कितने पत्थर तोड़ देती है और हज़ारों कंकड़ियों में बिखेर देती है। राजा जैसी इस एंग्री बर्ड ने तीन जगह तीर चला दिए। प्रधानमंत्री पर, चिदम्बरम पर और पूरी स्पैक्ट्रम प्रक्रिया पर।

—तुम नायं खेल रए, क्रुद्ध चिरैया खेल रई ऐं!

—हां चचा, जो चिड़िया गुलेल में फंस जाती है, जेल में अटक जाती है, बस विध्वंस पर आमादा हो जाती है।

 

 


 


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