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और... और...... और.......... क्या!

aur-aur-aur-kyaa

 

 

 

 

 

 

 

 

और… और…… और………. क्या!

(संबोधन बदल जाएं तो समझिए कि संबंध बदल गए)

 

तुम भी

जल थे

हम भी

जल थे

इतने

घुले-मिले थे

कि

एक दूसरे से

जलते न थे।

 

न तुम

खल थे

न हम

खल थे

इतने

खुले-खुले थे

कि

एक दूसरे

को

खलते न थे।

अचानक

हम

तुम्हें

खलने लगे,

और

तुम

हमसे

जलने लगे।

 

तुम

जल से

भाप

हो गए,

और

‘तुम’ से

‘आप’

हो गए।

 

और… और……

और………. क्या!

 

 


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