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असमानता कहां है डैमोक्रेसी में!

asamaanataa kahaan hai demokresee mein

 

 

 

 

 

 

 

 

 

असमानता कहां है डैमोक्रेसी में!

(डैमोक्रेसी में आज़ादी और समानता जीवन-मूल्य बताए जाते हैं)

 

पार्क के कोने में

घास के बिछौने पर लेटे-लेटे

श्रीमान जी अपनी प्रेयसी से पूछ बैठे—

क्यों डियर!

डैमोक्रेसी क्या होती है?

 

वह बोली—

तुम्हारे वादों जैसी होती है!

इंतज़ार में बहुत तड़पाती है,

झूठ बोलती है सताती है।

तुम तो आ भी जाते हो,

ये कभी नहीं आती है!

 

उन्होंने एक विद्वान से पूछा

विद्वान बोले— हमने राजनीति-शास्त्र

सारा पढ़ मारा,

डैमोक्रैसी का मतलब है—

आज़ादी, समानता और भाईचारा।

आज़ादी का मतलब रामनाम की लूट है,

इसमें गधे और घास

दोनों को बराबर की छूट है।

घास आज़ाद है कि चाहे जितनी बढ़े,

और गदहे स्वतंत्र हैं कि

लुटलुटी मारते हुए बैठे या खड़े,

मनचाहा करें,

जितना चाहें इस घास को चरें।

 

और समानता!

कौन है जो इसे नहीं मानता?

हमारे यहां

ग़रीबों और ग़रीबों में समानता है,

अमीरों और अमीरों में समानता है,

मंत्रियों और मंत्रियों में समानता है,

संत्रियों और संत्रियों में समानता है।

चोरी, डकैती, सेंधमारी, बटमारी

राहज़नी, आगज़नी, घूसख़ोरी, जेबकतरी

इन सबमें समानता है।

बताइए कहां असमानता है?

 


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