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  • ऐसा सोचा खुरपेंची दिमाग़ ने
  • ऐसा सोचा खुरपेंची दिमाग़ ने

    —चौं रे चम्पू! तेरे खुरपैंची दिमाग नैं कौन सी गल्त बात देखी पिछले दिनन में?

    —चचा, ग़लत बातों के अम्बार हमारे चारों तरफ हैं। हां, तुमने खुरपैंची दिमाग़ कह कर मेरा सम्मानबढ़ाया, उसके लिए शुक्रिया। ये दिमाग किसी एक मुद्दे पर अटक जाय तो वातावरण में प्रदूषण कीतरह चारों मंडराने लगता है। शिमला गया था एक कविसम्मेलन के लिए। स्वच्छ पर्यावरण! हरीतिमादेखकर बड़ा सुकून मिला। ऊपर मौसम की गुलाबी ठण्डक ने धन्य कर दिया। और जब उस ठण्डेवातावरण से नीचे कालका तक आए तो फिर से लगी गर्मी। शताब्दी में बैठे तो पुन: तरावट में आगए। जब शताब्दी दिल्ली पहुंचने वाली थी तो एक उद्घोषणा सुनकर फिर से दिमाग़ में गर्मी चढ़नेलगी।

    —का भयौ जे बता!

    —चचा, उद्घोषणा थी कि दिल्ली में आपका स्वागत है और यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी पानीकी बोतल या तो अपने साथ ले जाएं अथवा उसे नष्ट कर दें, ताकि दुरुपयोग न हो सके, धन्यवाद। और मेरा खुरपैंची दिमाग़, जैसा कि तुमने कहा, अलाय-बलाय सोचने लगा।

    —का सोची तैनैं?

    —सोचने ये लगा कि जब पूरा संसार प्लास्टिक से लड़ रहा है तो पानी की बोतल आधी भरी भी रहगई तो पानी महत्वपूर्ण है या बोतल का अपने साथ ले जा कर कहीं भी फेंक देना! मनुष्यता  के लिए हानिकारक क्या है। जितने लोग पानी की बोतल अपने साथ ले जाएंगे, ऑटो में, टैक्सी में,कार में बैठेंगे, पानी समाप्त करेंगे और सड़क पर बोतल फेंक देंगे। वह लुढ़कती हुई मनुष्यता केकिस गर्भ में जाकर कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन करेगी, क्या पता। प्लास्टिक जैसी  चीज़ जोमनुष्यता के लिए हानिकारक है, वह यदि डिब्बे में ही छोड़ दी जाए तो उसको समेटकर, सही स्थानपर पहुंचाने में रेलवे विभाग को सुविधा होती, लेकिन नहीं! वे तो संदेह करते हैं, अपने ही लोगों पर!बोतल का दुरुपयोग होगा। अब दुरुपयोग क्या हो सकते हैं मैंने सोचना शुरू किया।

    —का सोची तैनैं?

    —एक दुरुपयोग तो ये हो सकता है कि रेलवे सुरक्षा पुलिस की नाक के नीचे चोर आएंगे और वेबोतल चुराकर ले जाएंगे। बोतल बिना किसी प्लांट में गए, गटर के अथवा ज़मीन के पानी सेभरकर पुन: डिब्बे में प्लांट कर दी जाएगी! अर्थात, रेलवे की सुरक्षा पुलिस पर रेलवे को भरोसा नहींहै। अरे, बोतल कोई कान का झुमका तो है नहीं कि कोई जेब में डालकर ले जाएगा। सत्तर यात्रियोंके डिब्बे से कोई सत्तर बोतल निकालकर ले जाएगा तो किसी की नज़र में न आए, ऐसा हो ही नहींसकता। फिर हर डिब्बे में एक अटैंडेंट होता है। या तो वह स्वयं चोर है या चोरों का मददगार है। यानी, रेलवे को अपने स्टाफ़ पर ही भरोसा नहीं है। दूसरी बात यह कि अगर बोतल नष्ट कर भी दीजाए तो क्या उससे प्लास्टिक नष्ट हो जाती है? तीसरी बात, बोतल नष्ट करने के बाद कबाड़ियों केपास जाती हैं और वह भी बिना चोरी के नहीं जा सकतीं। यात्री अगर उसे नष्ट भी करेगा तो भीदुरुपयोग रुक जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। निरीह यात्री को एक ऐसे निरर्थक काम पर लगादिया जिससे अहित ज़्यादा हो रहा है। बोतल नष्ट करने के लिए कोई हथौड़ा तो लेकर आता नहीं है। मैंने देखा कि एक आदरणीया जब बोतल की गर्दन मरोड़ने लगीं, उनकी चार चूड़ियां टूट गईं। अच्छीखासी सधवा थीं, चूड़ियां टूटने से खीझ गईं। विदेशों की तरह यात्रियों का छोटी-मोटी चोटों के लिएकोई बीमा तो होता नहीं है। चौथी बात, प्लास्टिक ऐसी अजर-अमर वस्तु बनाई है इंसान ने जोइंसानियत के लिए भयंकर हानिकारक है, यह सब जानते हैं। थैलों के मामले में तो जागरूकता आगई है, लेकिन बोतल अभी भी पर्यावरण के लिए चुनौती बनी हुई है। रेलवे को अपने ईमानदारकर्मचारियों पर भरोसा होना चाहिए कि छोड़ी गई पानी की बोतल को वे यथास्थान पहुंचाएंगे। निरीहयात्री को एक दुष्कर कर्म सौंपने के स्थान पर रेलवे को आत्मचिंतन करना चाहिए। ऐसा सोचा मेरेखुरपेंची दिमाग़ ने। ग़लत सोचा क्या?

    wonderful comments!

    1. Anju Juneja Nov 23, 2012 at 4:32 pm

      वाह, वाह ! क्या बात कही दिमाग है खुरपैंची बिलकुल सही बात है आपकी सोलह आने सच पीछे से यह खुर चलाये आगे से मारे 'पन्च' इसी खुरपैंची ने क्या बिछाई बिसात एक को बनाया दाऊद एक को कसाब एक को मिली फांसी एक के शाही ठाठ

    2. Anju Juneja Nov 23, 2012 at 4:32 pm

      वाह, वाह ! क्या बात कही दिमाग है खुरपैंची बिलकुल सही बात है आपकी सोलह आने सच पीछे से यह खुर चलाये आगे से मारे 'पन्च' इसी खुरपैंची ने क्या बिछाई बिसात एक को बनाया दाऊद एक को कसाब एक को मिली फांसी एक के शाही ठाठ

    3. Anju Juneja Nov 23, 2012 at 4:32 pm

      वाह, वाह ! क्या बात कही दिमाग है खुरपैंची बिलकुल सही बात है आपकी सोलह आने सच पीछे से यह खुर चलाये आगे से मारे 'पन्च' इसी खुरपैंची ने क्या बिछाई बिसात एक को बनाया दाऊद एक को कसाब एक को मिली फांसी एक के शाही ठाठ

    4. bhavanaDixit Dec 14, 2012 at 3:05 pm

      Ek dam sach hai, per Relway ke uchchadhikari itna hi achchi soch rakhte to or bhi asuvidhao ka dhayan rakhte

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