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  • आप लोग धीरज क्यों खो रहे हैं?
  • आप लोग धीरज क्यों खो रहे हैं?

    aap log dheeraj kyon kho rahe hai

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    आप लोग धीरज क्यों खो रहे हैं?

    (दुर्घटना और क्रोध अन्योन्याश्रित हैं, तकरार से बचाती है सरल बुद्धि)

     

    मोड़ के इधर से

    श्रीमान जी की

    दनदनाती हुई

    साइकिल जा रही थी,

    उधर से

    ‘राम नाम सत्य है’

    एक

    अर्थी आ रही थी।

     

    भीषण भिड़ंत हुई

    भयानक हड़बड़ी,

    अर्थी बेचारी

    नीचे गिर पड़ी।

     

    —दिखाई नहीं देता

    उल्लू की दुम।

    कैसे चलाते हो तुम?

     

    दूसरा अर्थी-ढोऊ बोला—

    नालायक!

     

    तीसरा बोला—

    पाजी!

     

    चौथा बोला—

    बद्तमीज़!

     

    गालियां पचाते हुए

    श्रीमान जी ने कहा—

    एक्सक्यूज़ मी प्लीज़!

    आप लोग

    धीरज क्यों खो रहे हैं?

    जो गिर पड़ा

    वह तो

    कुछ कह नहीं रहा

    आप लोग

    ख़ामख़ां

    नाराज़ हो रहे हैं।

     

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