अशोक चक्रधर > Blog > खिली बत्तीसी > आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं!

आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं!

20120815 -248 - aao svaadheenataa divas par tuk milaaen

आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं!

(तुक मिलानी है लेकिन बात बेतुकी नहीं बतानी है)

चलिए तुक मिलाइए,

बात को आगे बढ़ाइए—

हमें आज़ाद हुए पैंसठ साल हो गए?

 

—इस घर में जितने रहने वाले हैं

उनसे ज़्यादा सवाल हो गए।

 

—माना पहले से ज़्यादा ख़ुशहाल हो गए,

लेकिन कंगाल तो और कंगाल हो गए।

कंगालों से जुड़े सवाल विकराल हो गए।

 

—कभी पड़ौसी जी का जंजाल हो गए,

कभी घर में ही धार्मिक धमाल हो गए,

हम एक दूजे के लिए काल-कराल हो गए,

दिलों में अंतराल हो गए,

बिना बात गुस्से के उबाल हो गए,

लेकिन शांत भी तत्काल हो गए।

 

—कुछ अरसे के लिए आपातकाल हो गए,

बाद में उसका मलाल हो गए।

कभी निहायत बेशर्मी से निहाल हो गए,

बदरंग पर्यावरण में बदहाल हो गए।

बमों की तरह फूट कर बबाल हो गए,

दुर्घटनाओं से कम अस्पताल हो गए।

 

—बहुत से मसलों में मिसाल हो गए,

छाती चौड़ी करके विशाल हो गए।

लेकिन गुरुघंटालों की मेहरबानी से

घोटाला-घोटाल हो गए।

 

—दलीलों से ज़्यादा दलाल हो गए।

स्नेह छोड़ नफ़रत के नक्काल हो गए।

पता नहीं कहां-कहां इस्तेमाल हो गए।

 

ऐसे या वैसे जैसे भी बहरहाल हो गए,

इन पैंसठ सालों में हम

किसी भी क्षण आ जाने वाला

भूचाल हो गए।

 


Comments

comments

1 Comment

  1. Guru ji,
    Kavita padh gaal sharam se laal ho gaye
    Desh ki durdasha pe aapke vichar
    vaah vaah kamaal dhamaal ho gaye

Leave a Reply