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    आओ प्यारे दौड़ के आओ

    (जो भी पथ से भटक गया है, जो भी रस्ता भूला है)

     

    आओ प्यारे दौड़ के आओ

    मेरे अंदर झूला है।

     

    लम्बी-लम्बी पींग भरोगे

    बिलकुल नहीं थकोगे तुम,

    ऐसा ऊंचा झोटा दूंगा

    तारे तोड़ सकोगे तुम।

    मैं नभ में ले जाऊंगा

    फिर धरती पर लाऊंगा,

    जिसको सुनकर खूब हंसोगे

    ऐसा गाना गाऊंगा।

    आंसू के दलदल में दुनिया

    नाहक आगबबूला है।

    आओ प्यारे… मेरे अंदर झूला है।

     

    लोहे की हो, रेशम की हो

    मत घबराना सूती से,

    आस की डोरी थामे रहना

    प्यारे तुम मज़बूती से।

    झूले की पटरी ऐसी है

    जीवन पटरी पर आए,

    हवा चलेगी, केश उड़ेंगे

    बलखाती मस्ती छाए।

    तुम्हें लगेगा आज वक़्त का

    पूरा दाम वसूला है।

    आओ प्यारे… मेरे अंदर झूला है।

     

    जहां पहुंचना चाह रहे हो

    झूले से पहुंचाऊंगा,

    जहां न झूला जा पाएगा

    बादल से ले जाऊंगा।

    शुद्ध पवन के पहिए होंगे

    किरणें जिनको खींचेंगी,

    मंज़िल की क्यारी-क्यारी को

    मुस्कानों से सींचेंगी।

    फूलों जैसा इसे बनाओ

    मुंह ऐसे क्यों फूला है?

    आओ प्यारे… मेरे अंदर झूला है।

     

    wonderful comments!

    1. राजेश निर्मल Mar 4, 2013 at 12:09 am

      वाह ! मज़ा आ गया।

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