उड़ जा रे कागा

उड़ जा रे कागा

    —चौं रे चम्पू! और सुना का सुनायगौ?   —सुनाऊं क्या? मैं स्वयं किशोरी अमोनकर नाम के उत्तुंग शिखर से आती हुई गूंज में डूबा हूं। ‘सहेला रे…’ या ‘उड़ जा रे कागा…’। गायन-गूंज दिल में आकर बैठ गई है चचा!   —सुनी ऐ कै बड़ी नकचढ़ी हतीं।   —नारियल की तरह बाहर से…


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