मीडिया

इस ओर है छतेरा

टेलीफ़िल्म

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में अशोक जी ने विभाग को नया रूप-रंग और आकार देने का प्रयत्न किया। प्रो. असगर वज़ाहत के साथ मिलकर उन्होंने चाहा कि हिन्दी विभाग का नाम ‘हिन्दी एवं मीडिया अध्ययन विभाग’ हो जाए। और इसी प्रक्रिया में उन्होंने टीवी पत्रकारिता और मास मीडिया के पाठ्यक्रम शुरू करवाए। चूंकि अशोक जी स्वयं फिल्म बनाते रहे हैं। उन्होंने रचनात्मक लेखन के साथ-साथ तकनीकी दक्षता भी अपने विद्यार्थियों को देने का प्रयास किया। ‘इस ओर है छतेरा’ नामक वृतचित्र उनके निर्देशन में टीवी पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने बनाया। ‘छतेरा’ एक गांव है। जहां हिन्दू-मुस्लिम आबादी मिलजूल कर रहती है। इस फ़िल्म में भारत का एक गांव बोलता है और दिखात है कुछ तस्वीरें जो कुछ उजली हैं तो कुछ सांवली।