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साक्षरता निकेतन

वृतचित्र / लेखन-निर्देशन

फ़िल्म-निर्माण की कोई औपचारिक शिक्षा अशोक चक्रधर ने नहीं ली। वे कहते हैं कि फ़िल्म-निर्माण उन्होंने काम के दौरान प्राप्त अनुभवों से सीखा। सन्‌ १९६७ से वे आकाशवाणी के लिए लेखन एवं प्रस्तुति किया करते थे। सन्‌ १९७२ से वे दूरदर्शन के लिए लेखन एवं प्रस्तुतिकरण का कार्य करने लगे। फ़िल्म का तकनीकी ज्ञान उन्हें सर्वश्री शिव शर्मा, राजमणि राय, एस. एन. धीर, गोपाल गुप्ता, शरद दत्त, कुबेर दत्त, कमलिनी दत्त जैसे कार्यक्रम निर्माताओं, अरुण सकट, दुलाल साइकिया जैसे फ़िल्म-संपादकों तथा शिवराजन, दीपक हालडंकर और सुरेन्द्र राजन जैसे छायाकारों से प्राप्त हुआ।

सातवें दशक के अंत में भारत में टेलीवीज़न १६ एम.एम. की फ़िल्म से यूमैटिक टेप की ओर अग्रसर हो रहा था। दिल्ली में स्वामी नगर स्थित संस्था ‘सैण्डिट’ उन अग्रगामी संस्थाओं में से है जिन्होंने सामाजिक विषयों के लिए रंगीन यूमैटिक तंत्र का प्रयोग किया। ‘सैण्डिट’ संस्था के लिए आठवें दशक में अशोक चक्रधर ने लेखन-निर्देशन का काफ़ी कार्य किया। यहीं उनकी भेंट श्री दुलाल साइकिया से हुई। विविधत्‌ फ़िल्म-निर्माण प्रशिक्षण का श्रेय अशोक जी दुलाल साइकिया को देते हैं जो मूलतः एक फ़िल्म संपादक हैं।

‘साक्षरता निकेतन’ वृत्तचित्र अशोक चक्रधर ने ‘सैण्डिट’ के लिए श्री दुलाल साइकिया के साथ मिलकर बनाया। लखनऊ के डालीगंज क्षेत्र में चिकनकारी का काम करने वाले निरक्षर कामगारों को साक्षरता की ओर आकृष्ट करने के सात दिवसीय प्रयत्नों का पूरा लेखा-जोखा है फ़िल्म— ‘साक्षरता निकेतन’। साक्षरता निकेतन के तत्कालीन निदेशन प्रो. जलालुद्दीन ने किस प्रकार एक संगोष्ठी आयोजित करके डालीगंज के यथार्थ से फिल्मांकन-टीम को परिचित कराया, किस प्रकार डालीगंज के निवासियों के साथ टीम का संवाद हुआ, किस प्रकार स्थानीय आवश्यकताओं को समझकर एक नौटंकी स्क्रिप्ट बनाई गई और किस प्रकार साक्षरता निकेतन की कठपुतली मंडली ने नौटंकी को तैयार किया और किस प्रकार अंत में डालीगंज के निवासियों के बीच ‘चिकन चमेली’ नामक उस कठपुतली नौटंकी का प्रदर्शन हुआ, यह सब एक क्रमिक विकास यात्रा के रूप में फ़िल्म में देखा गया है। ‘साक्षरता निकेतन’ एक लंबा वृत्तचित्र होते हुए भी रोचक है। दुलाल साइकिया के चुस्त संपादन ने फ़िल्म को कहीं भी शिथिल नहीं होने दिया। भारत में वीडियो वृत्तचित्रों के इतिहास में ‘साक्षरता निकेतन’ का महत्वपूर्ण स्थान होना चाहिए।