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बुआ-भतीजी

धारावाहिक / लेखन-निर्देशन

महिलाओं में जागरूकता और स्त्री-स्वातंत्र्य के पश्चिमी नारे से शहरों के अनेक लोग वाकिफ़ हैं। परंतु इसी विषय को अर्थशास्त्र से जोड़कर गांवों की अनपढ़, ग़रीब, कमेरी महिलाओं तक पहुंचाना, साथ ही उन्हें काम के गुर और व्यापार-संबंधी शिक्षा देने का मुश्किल काम जाने-माने कवि अशोक चक्रधर द्वारा लिखित और निर्देशित धारावाहिक ‘बुआ भतीजी’ में बखूबी निभाया गया है।

धारावाहिक में अनपढ़ बुआ (अमिता उद्गाता) और पढ़ी-लिखी भतीजी (रेखाश्री) के सरल-सहज संवादों के माध्यम से अर्थशास्त्र जैसे गूढ़ विषय को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

एक हास्यकवि द्वारा लिखा गया यह धारावाहिक हास्यरस से मुक्त है, लेकिन नीरस नहीं। ‘बुआ-भतीजी’ अशोक चक्रधर के शिक्षक पक्ष को उजागर करता है। इस बात से कई लोग अपरिचित होंगे कि अपनी चुटीली कविताओं से श्रोताओं को गुदगुदाने वाले अशोक चक्रधर जामिआ मिल्लिया में हिंदी के शिक्षक हैं। हिंदी के अध्यापक होने के बावजूद अर्थशास्त्र की डिमांड-सप्लाई, बाज़ार और व्यापार के मुद्दों को गीतों और कविताओं में ख़ूबसूरती से बुना गया है। धारावाहिक में काम के स्वरूप और उन्हें संवारने के नियम सिखाए गए हैं। तरबूज़ के छोटे-बड़े टुकड़े करके, बाज़ार के टुकड़े करना सिखाना, या फि र मुट्ठी बंद कर संगठन की महत्ता समझाने से यह विषय महिलाओं के लिए सहज रूप से ग्राह्य बन गया है। जहां गीत-संगीत, वाचन और अभिनय ने इसे मनोरंजक बनाया है, वहीं यह शिक्षाप्रद भी है।

अशोक चक्रधर कहते हैं- ‘महिलाओं को मौखिक सहानुभूति या उपदेश तो हर जगह मिल जाते हैं, लेकिन उनका व्यावहारिक उद्घार तभी संभव है, जब वे अपने आसपास की चीज़ों से भली-भांति परिचित हों और काम की समझ रखें। इस धारावाहिक में हमारी यही कोशिश रही है।’

गांव की स्त्री, चाहे हिंदू हो या मुसलमान, राजस्थान की हो या पहाड़ की, घड़े-सुराही बनाए या बिंदी-टिकुली बेचे, उसे कमोबेश एक ही जैसी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है। बुआ संपूर्ण भारत की इन कमेरी महिलाओं का जीवंत रूप है। कहीं वह चाय बेचती है, तो कहीं भेड़ चराती है, कहीं तरबूज़ बेचती है तो कहीं फूलों की माला बनाती है।

भतीजी एक जादुई चरित्र है। बुआ जब भी डिबिया रगड़ती है भतीजी प्रकट हो जाती है। इस छैल-छबीली भतीजी का किरदार रेखाश्री ने अदा किया है। नाचती-गाती, खेल-खेल में ही पढ़ी-लिखी भतीजी बुआ को कारोबार की गूढ़ बातें सिखाती है। इस धारावाहिक का कुशल संपादन अशोक जी के छोटे भाई अरविंद बब्बल ने किया तथा संगीत दिया। उनकी पत्नी के बड़े भाई डॉ. मुकेश गर्ग ने इस धारावाहिक के निर्माण के दौरान ही फ़िल्म की नायिका रेखाश्री और अरविंद बब्बल में प्रेम हो गया और थोड़े समय बाद ही रेखाश्री रेखा बब्बल बनकर अशोक जी के परिवार की सदस्य हो गईं।

अशोक चक्रधर की कविताओं की तरह इस धारावाहिक में भी उनके चुटीले हास्य-व्यंग्य और पैनेपन को खोजते आम शहरी दर्शक के हाथ शायद निराशा ही लगे, किंतु देश के क