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काव्य संकलन

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अशोक चक्रधर की छवि मुक्त छंद में लिखने वाले हास्य-व्यंग्य के कवि की है। वे छिटपुट गीत रचना करते रहे हैं, यह तो लोग जानते हैं, किंतु गीत विधा में भी उन्होंने पर्याप्त और गंभीर कार्य किया है। इस तथ्य से प्रायः लोग अपरिचित हैं। अपने लिखे एवं निर्देशित किए हुए धारावाहिकों में उन्होंने स्वयं गीत लिखे हैं। ये गीत सोद्देश्य हैं। कहीं साक्षरता के लिए, कहीं महिलाओं के बहुमुखी विकास के लिए तो कहीं क़ानूनी जागरूकता के लिए। ‘चिड़िया की उड़ान’ का गीत संकलन का सर्वश्रेष्ठ गीत है जो अनेक अर्थ छवियां रखता है। इसे हम चाहें तो किसी कन्या के पहली बार अपने परिवेश से बाहर निकलने की स्थिति के उल्लास का गीत मान सकते हैं तो दूसरी ओर इसमें भारतीय जनजागरण के प्रतीक-संदर्भ भी दिखाई देते हैं। इस संकलन में वे गीत भी सम्मिलित हैं जिनकी संगीत रचना उस्ताद अमजद अली खां ने की और जो आशा भौंसले, अनुराधा पोढवाल, सोनू निगम आदि द्वारा गाए गए हैं। वैयक्तिक गीत प्रायः नहीं है। इस संकलन के बाद पाठक उम्मीद करेंगे कि अशोक चक्रधर अंतरंग संवेदनाओं के वैयक्तिक गीत भी लिखें। …और यदि लिखे हों तो उनका संकलन भी आए।

अनुक्रम

  • सद्भावना गीत
  • झूम रही बालियां
  • छूटा गांव, छूटी गली
  • चिड़िया की उड़ान
  • ज़रा मुस्कुरा तो दे
  • नया साल हो
  • नई भोर
  • घर बनता है घर वालों से
  • क़ुबूल करो
  • अपना तिरंगा परचम
  • भारत है देश न्यारा
  • अपनी धरा अपना गगन
  • मुंगेरी लाल के हसीन सपने
  • हल्दी चढ़ने का गीत
  • संसार इक बाज़ार
  • बोलो भाई बम

‘ढाई आखर’ के गीत

  • कर लेना पढ़ाई
  • बधाई हो
  • सबके सब सहभागी हों
  • ओ भाई अभी नहीं
  • सीधे आए रजधानी से
  • आने वाले को बदलना होगा
  • भई बहुत अच्छे
  • ओमी चमेली की शादी
  • ये कुल तीन थे बस
  • बमलहरी
  • अकेली एक औरत
  • सारी मात्रा, सारे वर्ण
  • जी बिलकुल ठीक है
  • श्रद्धा हो, भाव हो
  • हम तो पढ़ते जाएंगे
  • ये तो सुनती नहीं
  • इकाई दहाई

‘बुआ-भतीजी’ के गीत

  • नीति बदलेगी नहीं
  • रैन गई ओ नवेली
  • बूआ एक रूप अनेक
  • सत्य दिखलाना है
  • ये है जिम्मेदारी
  • कितनी कमाई
  • सुन बुआ
  • कितना उजाला
  • असल चीज़ बाज़ार है
  • मांग पहचान बुआ
  • हर कोई कीमत ऐसे रखता
  • समझ व्यापार बुआ
  • असल मुनाफा क्या है

  • लागत होती क्या री
  • बुआ बजट बनाएं
  • बात को समझो रे
  • कितना ज़रूरी होता
  • बुआ तू समझ गई

 

‘आंगन’ के गीत

  • एक घर हो
  • बम पै प्यारे हम बोले

 

‘बोल-बसंतो’ के गीत

  • इसलिए बोल बसंतो
  • वैसे ही जीवन में क़ानून है
  • तो क्या होता जी
  • ऐसे होती नहीं है शादी
  • मुस्लिम शादी में
  • लपटें ये उठती देखो
  • कुछ दोहे
  • कांप-कांप जाए रे जियरा
  • कब तलक सहती रहें
  • खर्चा-पानी देना होगा
  • झौंका एक झौंका
  • कहानी आंखों से बही
  • नित नई कहानी
  • पुलिस पर भी
  • एफ.आई.आर. माने
  • इसे जानना होगा
  • मजदूरी के दोहे
  • देना होगा
  • बंधुआ मज़दूरी मजबूरी नहीं
  • जुगत करो जीने की
  • दुखों की क़ैद में बेकल

‘गुलाबड़ी’ के गीत

  • सुनी न म्हारी टेर
  • लोरी- जाने दे रे
  • ऐसे काया जलती है
  • कि मर गई मैं
  • चंदा के चाक पे

‘बिटिया’ के गीत

  • डिप्टी साहब का स्वागत गीत
  • रतनलाल परमेसरी संवाद
  • नहीं नहीं शादी नहीं
  • अंगूरी बनी अंगारा
  • हैं ग़म ही ग़म विधाता
  • जाने क्यों तू समझ न पाता है
  • दो दोहे