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हंसो और मर जाओ

काव्य संकलन

Hanso Aur Mar Jao - Hindi Poetry by Ashok Chakradhar‘हंसो और मर जाओ’ की हास्य-व्यंग्य कविताओं को उन्होंने तीन भागों में बांटा है। काम, कामनाएं और शुभकामनाएं। काम खंड में ‘जंगलगाथा’, ‘अस्पतालम् खंड-खंड काव्य’ तथा शीर्षक-कविता ‘हंसो और मर जाओ’ उल्लेखनीय हैं। ‘जंगलगाथा’ में उन्होंने प्राचीन जातक कथा शैली के मनुष्येतर प्रतीकों के माध्यम से वर्तमान राजनीति पर करारा व्यंग्य किया है। अस्पताल वाली कविता चिकित्सा-जगत और चिकित्सकों की दुर्व्यवस्था की तस्वीरों की एक श्रृंखला है। इन स्थितियों पर हंसी भी आती है और तकलीफ़ भी होती है। शायद इसीलिए इस संकलन का शीर्षक ‘हंसो और मर जाओ’ रखा गया है। ‘हंसो और मर जाओ’ शीर्षक कविता में न के वल हंसी की महत्ता बताई गई है बल्कि ऐसी बहुत सारी स्थितियों के दृश्य-चित्र उपस्थित किए हैं जिनसे हंसी का उद्गम होता है। फि र भी एक बात तो ध्रुव सत्य की तरह ध्रुव पंक्ति में दोहराई जाती है कि ‘हंसी चीज़ करामाती है, आती है तो आती है, नहीं आती है तो नहीं आती है।’ कामनाएं खंड में सात छन्दबद रचनाएं हैं जिनमें राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक सद्भाव की कामना व्यक्त की गई है।

अशोक जी सन्‌ १९८० से अपने मित्रों एवं परिचितों को नववर्ष पर शुभकामना के रूप में एक कविता भेजते रहे हैं। शुभकामनाएं खंड में इन्हीं वार्षिक कविताओं का संकलन है। कहना न होगा कि इन कविताओं के ज़रिए हम निकट अतीत के कु छ वर्षों के यथार्थ में झांक सकते हैं।

अनुक्रम

काम

  • ओज़ोन लेयर
  • जंगल-गाथा
  • परदादारी
  • पूंछ और मूंछ
  • राजकुमार का काला चश्मा
  • दानसिंह दूधिया
  • उत्तर एक
  • अस्पतालम्‌ खंड-खंड काव्य
  • अलबत्ता
  • हॉटलाइन पर
  • हंसो और मर जाओ
  • लाए साड़ी बलमा अनाड़ी
  • कैमरा देव की आरती
  • अब तो पगले मुस्कुरा
  • ज़िंदगी का आंकड़ा
  • बात करनी है तो कर लो
  • शिमला की माल रोड
  • मिन्नतें कीं बहुत
  • फूलों से शर्मिंदा

कामनाएं

  • क्या हो अख़बार में
  • चिट्ठी राम के नाम
  • एक मरे, दो मरें, दस मरें
  • लो ये ख़बर कलमुंही आई
  • सत्यव्रत
  • घर बनता है घर वालों से
  • सद्भावना गीत

शुभकामनाएं

  • गया उनासी आया अस्सी/१९८०
  • अस्सी क्षमताएं/१९८१
  • इक्यासी का म्यूज़ियम/१९८२
  • शुभकामनाएं नए साल की/१९८३
  • आ गया नया साल/१९८४
  • धन्य चौरासी तुझे धिक्कार/१९८५
  • सतासी तू इतना कर दे/१९८७
  • मोटी-मोटी दो महिलाएं/१९८८
  • दे रहा नवासी नवाशीष/१९८९
  • अक्कड़-बक्कड़/१९९०
  • कहे नाइंटी वन, ये कैसा जीवन/१९९१
  • आइए सर बानवै/१९९२
  • राम राम राम!/१९९३