पुस्तकें

काव्यानुवाद

कविता का अनुवाद कविता में करना आसान नहीं होता। ख़ास कर तब जब तुकों के विधान का भी निर्वाह किया जाए। छंद के विधान को माना जाए। इन काव्यानुवाद में मौलिक काव्य-सा आनंद आएगा। पढ़िए तो सही! काव्यानुवाद का उनका ताज़ा काम है कपिल सिब्बल की ‘आई विटनेस’ पुस्तक का ‘किस-किस की जय हो’। कपिल जी स्वयं कहते हैं कि कुछ कविताओं का अनुवाद तो मूल से भी अच्छा बन पड़ा है। कविता के अनुवाद में कुछ छूट लेनी पड़ती है, कपिल जी ने यह छूट दी। तो कविताएं और निखर आईं।



गूंगी अभिव्यक्तियाँ

गूंगी अभिव्यक्तियाँ डॉ. लक्ष्मीधर मिश्रा की 19 खंडों में विभक्त एक लंबी कविता Language – Beyond a Vehicle of Expression का काव्यानुवाद है। इस अनुवाद की ख़ूबी यह है कि जितनी पक्तियां अंग्रेजी में हैं, ठीक उतनी ही पंक्तियां हिन्दी में भी हैं।…


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किस-किस की जय हो

कविता और स्वत:स्फूर्त सहजता साथ-साथ चलती हैं। कई बार कविता की प्रेरणा के पीछे चिंतन होता है। इस संग्रह में दोनों तरह की कविताएं शामिल हैं। मेरी सहज कविताएं उन ख़ास पलों से उभरी हैं जो मेरे मन को गहराई तक छू गए। कुछ कविताओं में मैंने विचारों को शब्दों में ढालने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप, पिछले चार सालों में कविताओं का एक सिलसिला चल निकला। इस संग्रह की कुछ कविताएं बिल्कुल नई हैं और कुछ इससे पहले ‘आई विटनेस’ नामक संकलन में छप चुकी हैं।…


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