अशोक चक्रधर > परिचय > पुस्तकें > समीक्षा > मुक्तिबोध की कविताई

पुस्तकें

मुक्तिबोध की कविताई

समीक्षा

मुक्तिबोध की कविताओं में फ़ैंटैसी का उपयोग और उनमें निहित गहन अर्थों को साधारण समीक्षक पकड़ नहीं पाते। अशोक चक्रधर अपनी इस नई पुस्तक में मुक्तिबोध की कविताओं की रचनाप्रक्रिया और अर्थप्रक्रिया में नए ढंग से प्रवेश करते हैं और एक बार फिर सिद्घ करते हैं कि चक्रधरीय ‘पाठ’ के रास्ते मुक्तिबोध की कविताएं ‘दुरूह’ नहीं हैं, बल्कि वे सहज अर्थवान कविताएं हैं। अपनी सहज समीक्षाई के ज़रिए मुक्तिबोध के पाठक को अशोक ऐसे व्याख्या- मार्ग में ले चलते हैं, जिसमें मुक्तिबोध की कविताओं के नए-नए अर्थ तो खुलते ही हैं, पाठक चाहे तो उनके नए अर्थ भी पा सकता है।

प्रस्तुत पुस्तक ‘मुक्तिबोध की काव्यप्रक्रिया’ नामक लेखक की प्रसिद्घ पुस्तक के कवितार्थ अंश का नया विस्तार है। अरसे से ‘मुक्तिबोध की काव्यप्रक्रिया’ पुस्तक अनुपलब्ध रही है जबकि पाठकों ने उसकी लगातार मांग की है। इस पुस्तक से पाठकों की वह मांग न केवल पूरी होगी, बल्कि उन्हें बहुत कुछ नई सामग्री भी मिलेगी।