पुस्तकें

स्नेहा का सपना

बाल साहित्य

यों तो यह कविता ‘चुटपुटकुले’ नामक पुस्तक में भी संकलित है, किंतु बाल पुस्तक के रूप में प्रकाशित होने के बाद यह व्यापक बाल-पाठकों के लिए भी उपयोगी हो गई। बच्चों के सपने निराले होते हैं। सपनों में कोई तर्क नहीं चलता किंतु स्नेहा के सपने में चलने वाली फ़ैटैसी में तर्क है। इस कविता की शक्ति इसकी शाब्दिक ध्वन्यात्मकता और भाषा की मनावैज्ञानिक सरलता में है।