पुस्तकें

हीरों की चोरी

बाल साहित्य

‘हीरों की चोरी’ एक बाल-उपन्यास है जिसका नायक अरुण एक किशोर है। अरुण का दिमाग़ हर तरह की गुत्थियां सुलझाने में बहुत तेज़ चलता था। झूठ को वह झट से पकड़ लेता था। शहर में अपराध बढ़ते जा रहे थे। छोटे से अरुण को बड़ी-बड़ी चिंताएं सताती थीं। ‘हीरों की चोरी’ का एक रहस्य उसने अपनी तीव्र तर्क-बुद्धि से हल कर दिया। पुस्तक की भाषा सहज मुहावरेदार है। रोचकता आद्योपांत बनी रहती है। सन्‌ 1972 में लिखी गई इस पुस्तक के बारे में अशोक जी बताते हैं कि इसकी प्रेरणा उन्हें अपने छोटे भाई अरुण से ही मिली थी जिसका 1980 में देहावसान हो गया। वे चाहते हैं कि अरुण की स्मृति में कुछ बाल-उपन्यास और लिखें जिनमें अरुण के साहसिक कारनामों का सजीव वर्णन हो।