पुस्तकें

एक बगिया में

बाल साहित्य

प्रभात की सुहानी बेला में चिड़ियों का चहचहाना, गुलाब की पंखुड़ियों का एक-एक करके खुलना, तदनंतर ओसकण, तितली, भंवरे व मधुमक्खी का आना और आकर बगिया में बतियाना, यह है इस पुस्तक की आधारभूमि। सरल व सहज भाषा में रचित यह बालकाव्य बच्चों के हृदय को गुदगुदाने में सफल है। अशोक चक्रधर गुलाब की कली के माध्यम से बच्चों को रस, गंध व सौंदर्य का संदेश देते हैं। उनका भावुक सा निश्छल कविहृदय जहां प्रकृति-प्रेम से सराबोर है, वहीं समरसता और मिलकर जीने की भावना से बालकों को परिचित कराता है। उनकी यह बालकृति कलह से बचकर जीने का मुखर संदेश देती है। बालक पप्पू प्रकृति से सीधी शिक्षा लेता है। कुटिल माली के रूप में बच्चों का भोलापन छीनने वालों को वार्निंग भी दी गई है। इस पुस्तक की एक विशेषता यह भी है कि पुलक विश्वास के चित्रों के साथ पूरी कथ्य-सामग्री अशोक जी के अपने हस्तलेख में है, जोकि सचमुच सुंदर है।