पुस्तकें

ताउम्र का आराम

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

सरला और चंदर गांव के बहुत से निरक्षरों से मिले। छुआछूत का कोई भेद नहीं। ऊंच-नीच का कोई सवाल नहीं। पुरुष केन्द्र के उद्घाटन पर सरपंच ने शुभकामनाएं दीं। पटवारी, ग्राम-सेवक और प्राइमरी स्कूल के अध्यापक भी उपस्थित हुए। महिला केन्द्र के उद्घाटन पर ख़ूब ढोलक बजी और महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया।

नट और नटी ने बड़े प्यार से कई गुर की बातें बताईं। पहली तो ये कि केन्द्र पर जो भी आता है उसे पढ़ने वाले में बदलना होगा। दूसरे ये कि हर पढ़ने वाले की अलग-अलग समस्याएं होती हैं, उन्हें समझना होगा। तीसरी ये कि बातचीत में सभी हिस्सा लें, इसका ध्यान रखना होगा। चौथी ये कि उन्हें प्यार-प्यार से अक्षरों की दुनिया में लाना होगा। नट और नटी ने और भी बहुत सारी बातें बताईं।

सरला और चंदर ने सारे सुझावों पर ध्यान दिया और मेहनत से काम किया। परिणाम भी अच्छा निकला। इस तीसरे भाग- ‘ताउम्र का आराम’ में पढ़ाई से होने वाले फ़ायदों का ज़िक्र है और अक्षरों की पहचान कराने की शुरूआत है।