पुस्तकें

रोती ये धरती देखो

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तक माला की तीसरी कड़ी है- ‘रोती ये धरती देखो’। भारतीय समाज में दहेज एक बहुत बड़ा अभिशाप है। ज्योति की सास कालीदेवी अपनी बेटी सुनीता के साथ मिलकर ज्योति को बहुत सताती है। काली देवी का परिवार शादी के बाद दहेज की नाजायज़ मांग करता है। अंततः मिट्टी का तेल छिड़ककर उसकी हत्या कर देते हैं। मामला कानून के घेरे में आ जाता है। लेकिन कानून ज्योति की जान तो वापस नहीं ला सकता। ज्योति के माता-पिता की लापरवाही दहेज का कारण बनी। ज्योति के मां-बाप को शुरू से दहेज का विरोध करना चाहिए था। हमारे समाज में यह धारणा कितनी ग़लत है कि लड़की की डोली तो मायके से निकले पर अर्थी ससुराल से ही निकलनी चाहिए। यह पुस्तक संदेश देती है कि लड़की वालों को चाहिए कि वे ससुराल में ज़ुल्म सहती हुई अपनी बेटी की ओर ध्यान दें और उसका साथ दें।