पुस्तकें

मज़दूरी की राह

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तकमाला की आठवीं कड़ी है- ‘मज़दूरी की राह’। लाजो की ज़िंदगी मुश्किल हालातों से गुज़र रही है। उसने रद्दी अख़बारों से लिफ़ाफ़े बनाने का कारोबार शुरू किया लेकिन ठेकेदार धोखेबाज़ निकले। लिफ़ाफ़े बनाने के काम में कमाई ज़्यादा नहीं हो रही थी, लाजो ने यह काम छोड़ दिया। फिर उसने फैक्ट्री में मज़दूरी का काम शुरू किया तो पाया कि उसे और दूसरी मज़दूरनियों को फैक्ट्री में बराबर के काम की पुरुषों से कम मज़दूरी मिलती थी। लाजो दूसरी मज़दूरनियों को लेकर श्रम अधिकारी से मिली। श्रम अधिकारी ने न्यूनतम मज़दूरी और समान वेतन आदि के श्रम से जुड़े हुए क़ानूनों की जानकारी दी। चावला श्रम अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश कर रहा था लेकिन श्रम अधिकारी एक ईमानदार व्यक्ति था। लाजो की मुलाक़ ात झुनिया से हुई। झुनिया के पति को कारख़ाने में दुर्घटना के बाद न तो कहीं नौकरी मिली और न मुआवज़ा। जागरूक लाजो श्रम कानूनों का हवाला देते हुए कारख़ाने के मैनेजर से भिड़ गई।