पुस्तकें

कहानी जो आंखों से बही

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तकमाला की छठी कड़ी है- ‘कहानी जो आंखों से बही’। यह कड़ी बलात्कार और अपहरण जैसे विषय से जुड़ी हुई है। दस बरस की बालिका को भी बलात्कार की यातना से गुज़रना पड़ा। प्रायः पुलिसकर्मी बलात्कार की शिकार महिलाओं से उल्टे-सीधे सवाल पूछते हैं और उन्हें बार-बार अपमानित होना पड़ता है। कुंदन एक विकृत मानसिकता का बलात्कारी है। उसने एक छोटी बच्ची के साथ बलात्कार किया और उसे रेलवे लाइन पर फेंक आया। बलात्कार जैसे अपराधों को चुपचाप सहन करने से अपराधियों को बढ़ावा मिलता है। मुजरिमों को सजा दिलवानी चाहिए। जुर्म को चुपचाप दबाना सही नहीं है। नन्हें….का गली के नुक्क़ड से अपहरण हो गया। ये सारी कहानियां आंखों से बहने लगीं। विधवा लाजो अब समाज-सुधार की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगी है। वकील सत्यव्रत बसंतो को क़ानूनी दावपेंच सिखाते हैं। इरफान की दिलचस्पी लाजो में बढ़ती जा रही है।