पुस्तकें

कब तलक सहती रहें

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तक माला की चौथी कड़ी है- ‘कब तलक सहती रहें’। भारतीय पुरुषप्रधान समाज में तलाक अभी पश्चिमी देशों की तरह आम नहीं हुआ है, लेकिन यदि अत्याचार सीमा पार कर जाएं तो हमारे क़ानूनों में तलाक का प्रावधान है। तलाक के मामले को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां समाज में फैली हुई हैं। रूढ़िवादी मान्यताओं के अनुसार शादी का बंधन किसी भी हालत में तोड़ा नहीं जा सकता और माना जाता है कि तलाक एक सामाजिक बुराई है। एक ग़लत अवधारणा यह भी है कि पति तो पत्नी को तलाक दे सकता है पर पत्नी को तलाक लेने का कोई हक़ नहीं। वकील सत्यव्रत और बसंतो चंद्रकांता, शकुंतला और हरप्यारी के तलाक और मुआवज़ों के मामलों को सुलझाते हैं।