पुस्तकें

भई बहुत अच्छे

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘ढाई आखर’ के पहले भाग में सरला-चंदर और नट-नटी का परिचय मिला। सरला और चंदर साक्षरता अभियान में लगे दो अध्यापक हैं। शहर से अपनी टे्रनिंग पूरी करके जब वे अपने गांव जा रहे थे तो रास्ते में नट और नटी मिले। नट और नटी थे जादुई। जब चाहे ग़ायब हो जाएं, जब चाहे प्रकट हो जाएं। उन्होंने सरला और चंदर को मदद करने का भरोसा दिया।

गांव में आकर चंदर अपने दोस्तों से मिला। सरला अपनी सहेलियों से मिली। अपने मन की बात बताई कि वे गांव में प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र खोलना चाहते हैं। कुछ लोगों ने विरोध किया पर सरला और चंदर ने हिम्मत नहीं हारी। गांव के बुजुर्गों से भी बातें कीं। आख़िरकार महिला केन्द्र खोलने के लिए रामवती का घर मिल गया और पुरुष केन्द्र खोलने के लिए बनवारी ने अपना घेर दे दिया।

पहले भाग में इस बात पर बल दिया गया था कि अध्यापक अपने गांव में साक्षरता के अभियान के लिए सभी की सहभागिता पर ज़ोर दें। इस दूसरे भाग- ‘भई बहुत अच्छे’ में बताया गया है कि सामाजिक सम्पर्क कैसे किया जाए, केन्द्र कैसे खोला जाए और केन्द्र पर आने वाले लोगों से पहले-पहले दिन बातचीत किस तरह से की जाए।