पुस्तकें

और पुलिस पर भी

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तकमाला की सातवीं कड़ी है- ‘और पुलिस पर भी’। इस कड़ी में पुलिस संबंधी क़ानूनों को रेखांकित किया गया है। पुलिस जनता और क़ानूनों की हिफ़ाज़त के लिए होती है। नागरिकों को पुलिस की हर संभव मदद करनी चाहिए। रमली का पति दारू पीकर उसकी पिटाई करता था। कमाई के पैसे छीनकर ले जाता था। मजबूर रमली ने एक नौजवान का बटुआ चुरा लिया लेकिन पकड़ी गई। पुलिस के एक हवलदार ने उसे पुरुषों के साथ थाने में बंद कर दिया। बसंतो सहायता के लिए वकील सत्यव्रत के पास गई लेकिन उन्होंने यह कहकर टरका दिया कि अपनी लड़ाई स्वयं लड़ो। बसंतो बस्ती की औरतों को इकट्ठा करके पुलिस से जुड़े हुए कानूनों की जानकारी हासिल करती है। इरफान और ऐनी बस्ती की औरतों को समझाती हैं कि एफ.आई.आर. क्या होता है और एफ.आई.आर. किसी के भी खिलाफ़ हो सकती है। चाहे वह पुलिस का कर्मचारी ही क्यों न हो। किसी भी वारदात की तुरंत एफツ आईツ आरツ करानी चाहिए और एफ.आई.आर. कराते वक़्त कोई भी बात नहीं छिपानी चाहिए। वकील सत्यव्रत बस्ती में जाकर महिलाओं को बताते हैं कि पुलिस अगर एफ.आई.आर. न लिखे तो क्या करना चाहिए तथा जमानत से जुड़े हुए क़ानून क्या होते हैं।