पुस्तकें

और कितने दिन

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तकमाला की दसवीं कड़ी है- ‘और कितने दिन’। यह कड़ी लाजो और बसंतो की विकास-यात्रा और क़ानूनी सहायता पर आधारित है। वकील सत्यव्रत ऐनी और इरफान को बसंतो की पूरी कहानी बताते हैं। यह एक सुखद आश्चर्य था कि क़ानून को कुछ न समझने वाली बसंतो अब क़ानून की मदद से सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लड़ रही थी। लाजो-बसंतो की झुग्गी-बस्ती को कानूनी मान्यता मिल चुकी थी लेकिन एक बड़े ठेकेदार ने अपने गुंडों की मदद से राशनकार्डों और ज़मीन के कागज़ात की चोरी करा ली। एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी ठेकेदार की मदद कर रहा था। मारपीट के कारण फ ौजदारी का मामला बन गया लेकिन महिलाओं के संगठित स्वरूप के आगे ठेकेदार की एक नहीं चली। लाजो और बसंतो कानून के काफ़ी दावपेंच सीख चुकी हैं और उन ठिकानों का पता लगाती हैं, जहां से क़ानूनी सहायता मिल सकती है। लाजो ने सत्यव्रत से अनुरोध किया था कि वे इरफान को मदद के लिए भेज दें। सत्यव्रत ने साफ मना कर दिया। क्योंकि वे चाहते थे बसंतो और लाजो बिना किसी की सहायता के अपनी लड़ाई स्वयं लड़ सकें। लाजो भी इरफान