पुस्तकें

अपना हक़ अपनी ज़मीन

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

‘बोल बसंतो’ पुस्तक माला की पांचवीं कड़ी है- ‘अपना हक़ अपनी ज़मीन’। लाजो के जीवन पर अचानक वज्रपात हुआ। उसका पति सुरेश एक सड़क दुर्घटना में मारा गया। दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ असहाय लाजो को रिश्तेदारों ने कोई सहारा नहीं दिया। सुरेश के भाई लाजो और सुरेश की शादी को इसलिए नहीं मानते थे क्योंकि उन्होंने परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी की थी। सुरेश के भाइयों ने लाजो को सम्पत्ति में हिस्सा देने से मना कर दिया। गांव की पंचायत ने भी लाजो का साथ नहीं दिया। इरफान पंचायत को क़ानूनों से परिचित कराना चाहता था लेकिन गांव वालों ने उसकी एक नहीं सुनी। हमारे समाज में लड़कियां मायके वालों से अपना हिस्सा मांगने में भी झिझकती हैं। वकील सत्यव्रत और बसंतो ने मिलकर दिलवाया उसका हक़, उसकी ज़मीन। नौजवान वकील इरफान अंदर-ही-अंदर लाजो को चाहने लगा।