पुस्तकें

अपाहिज कौन

प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित यह पुस्तिका खेसारी दाल के दुष्प्रभावों से किसानों को आगाह करती है। मध्य प्रदेश के सतना जिले के आसपास खेसारी दाल बहुतायत में होती है। इस फसल को उगाने में अधिक श्रम नहीं करना पड़ता। धनी किसान अपने खेत मज़दूरों को दिहाड़ी के रूप में खेसारी दाल देते आ रहे हैं। इस दाल के शीर्ष पर एक विष होता है जिससे लोग अपाहिज हो जाते हैं। दाल से विष निकालने के तरीके बड़े आसान हैं लेकिन न तो कोई ग़रीब खेत मज़दूरों को बताता है और न ही खेत मज़दूर उसके प्रति सतर्कता बरतते हैं। परिणामतः उस क्षेत्र में अपाहिजों की संख्या बढ़ती गई। पुस्तक में विक्रम परचुरे के चित्र दिल दहला देने वाले हैं। पुस्तक पाठकों के सामने एक सवाल छोड़ती है कि- अपाहिज कौन हैं? क्या वे लोग जो इस दाल के कारण लंगड़े हो गए या वे दिमाग़ जो जानबूझकर यह सब होने दे रहे हैं। सतना, ज़िबला, कोस्टा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर यह पुस्तक बांटी गई जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इस पुस्तक के बाद अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस दिशा में जागरूकता को बढ़ाया।