नवीनतम लेखन Latest Posts

बाली में लाली

पहले बीस साल निकल गए घरौंदा बनाने और बच्चों के लालन-पालन में। अगले बीस साल जीवन-मंच के संचालन में। चालीसवीं सालगिरह बच्चे मना रहे हैं बाली में। खुश है आपका चम्पू और प्रसन्नता है आपकी लाली में। प्यार आपस में बाँटा है। पूल में केक काटा है। बाक़ी बातें लौटने पर।


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हंसना बड़ा काम

जब जनता रोएगी तब क्या सिद्धू हंस पाएंगे? नकली ही सही, कुर्सी पर बैठकर उन्हें जनता के साथ रोना होगा। उन्हें रोता देख शायद मुझे सात्विक हंसी आ जाए और मेरे अदृश्य गुरु प्रसन्न हो जाएं।


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दुम पे हथौड़ा

यहां कल रात नींद नहीं आई चचा! जगती आंखों से सपने देख रहा था। झपकी लगती थी तो वही जाग्रत चिंताएं गतांक से आगे हो जाती थीं। वे चिंताएं सपने में निदान भी बता रही थीं।


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माई भागो और नलवा

माई भागो का संदेश है ‘लड़का-लड़की में समानता’ और हरीसिंह नलवा का ‘धार्मिक सहिष्णुता’। नलवा ने अनेक मस्जिदों, मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। दोनों ने अपने देश के कट्टपंथियों से मुकाबला किया और एक प्रगतिशील नज़रिया अपनाया था। ऑस्ट्रेलिया में अपनी नई पीढ़ियों को आकृष्ट करने के लिए धर्म की ऐसी व्याख्या यहां सफल सिद्ध हुई।


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दूसरा विश्वयुद्ध रंगीन

हिंसा ही हिंसा है। सैनिकों की कतार, नागरिकों का हाहाकार, हवाई हमले, युद्ध पोतों का डूबना, टैंकों का चलना, इमारतों का गिरना और लाशों के अम्बार। रात में देखता हूं और दिवास्वप्नों में युद्ध के दृश्य घूमते-मंडराते रहते हैं। फिर जब यहां की धूप में निकलता हूं, पार्कों में बच्चों को खेलते देखता हूं तो वे दृश्य गायब हो जाते हैं और मैं इतिहास से सबक लेकर आगे बढ़ते बच्चों को देखकर खुश हो जाता हूं।


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सिडनी मोबाइल गाथा

मेरा आईफ़ोन एयरपोर्ट से घर जाते हुए कहीं गिर गया था। कहां-कहां नहीं ढूंढा! ‘लॉस्ट एंड फ़ाउंड’ में फ़ोन करवाया। एप्पल के हर उपकरण में ‘फ़ाइंड माई फ़ोन’ लगाया, पर नहीं पाया। व्यथित-मन रात में अपना फ़ेसबुक पेज खोला तो देखा कि मेरे मैसेंजर पर किन्हीं मार्क साहब का संदेश था…..


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गुप्त दानवीर

चचा, आप जिसे दान मानते हैं, वैसा तो नहीं, पर सुपात्रों के लिए समय-दान करता हूं। सैकड़ों भूमिकाओं, विमोचनों और ग़ैरधनोपार्जक कामों में जो श्रमदान किया है, सो अलग। पत्थर उठाकर सड़क नहीं बनाता, पर शब्द उठाकर ऐसी जगह रख देता हूं जो पत्थर पर खोदे जा सकें।


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